पश्चिमी एशिया में शांति की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा 18 दिनों का सीजफायर अब पूरी तरह समाप्त हो गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। इस ताजा संघर्ष ने न केवल खाड़ी देशों में दहशत फैला दी है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी अस्थिर कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी गतिरोध अब एक पूर्ण युद्ध की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान की 7 छोटी नौकाओं को समुद्र में डुबो दिया है। ट्रम्प के अनुसार, ये नौकाएं व्यापारिक जहाजों के मार्ग में बाधा डाल रही थीं और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर रही थीं। इसके साथ ही ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया, तो ईरान को ‘धरती से मिटा दिया जाएगा’। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के पास अब केवल दो रास्ते हैं—या तो वह ईमानदारी से समझौते की मेज पर आए या फिर विनाशकारी हमलों के लिए तैयार रहे।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह स्थित एक महत्वपूर्ण पेट्रोलियम प्लांट पर ड्रोन हमला किया है। फुजैराह एक रणनीतिक पाइपलाइन हब है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करने की सुविधा देता है। इस हमले के कारण वहां के औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग लग गई। ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का असर इतना व्यापक था कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया है। वहीं, ब्रिटिश सेना ने भी अमीरात तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने की पुष्टि की है।
इस संघर्ष की सबसे दुखद कड़ी निर्दोष नागरिकों की जान जाना है। यूएई सरकार के अनुसार, ईरानी हमलों में अब तक कुल 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भारत, मिस्र और फलस्तीन के नागरिक शामिल हैं। इन हमलों में 3 भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने 12 बैलिस्टिक मिसाइलों और 2,260 से अधिक ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है, लेकिन फिर भी कुछ हमले नुकसान पहुँचाने में सफल रहे।
इधर, ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इन हमलों में ईरान का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने अमेरिका और यूएई को चेतावनी दी कि वे इस ‘युद्ध के दलदल’ में फँसने से बचें। अराघची ने जोर देकर कहा कि इस समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और इसे केवल कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। ईरानी मीडिया का यह भी आरोप है कि अमेरिका ने नागरिक नौकाओं पर हमला कर 5 निर्दोष नागरिकों की हत्या की है।
विवाद की मुख्य जड़ ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी है। अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की घेराबंदी कर रखी है, जिससे ईरान का तेल निर्यात और अन्य व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। ईरान की आर्थिक स्थिति बदहाल हो चुकी है, जिसके कारण वह अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए आक्रामक कदम उठा रहा है। अमेरिका का तर्क है कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब होर्मुज स्ट्रेट में एक दक्षिण कोरियाई जहाज पर हमला हुआ। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस हमले का सीधा आरोप ईरान पर मढ़ा है। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन जहाज में आग लगने से हड़कंप मच गया। इस घटना ने अमेरिका को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) जैसी पहल शुरू करने का मौका दे दिया, जिसके तहत वह वहां फंसे विदेशी जहाजों को अपनी सुरक्षा में बाहर निकालने का दावा कर रहा है।
क्षेत्रीय स्तर पर इस युद्ध का असर साफ देखा जा सकता है। पड़ोसी देश बहरीन ने सुरक्षा खतरों को देखते हुए देश में ‘नेशनल इमरजेंसी’ (राष्ट्रीय आपातकाल) घोषित कर दी है। यूएई की सेना भी हाई अलर्ट पर है और लगातार अपने हवाई क्षेत्र की निगरानी कर रही है। खाड़ी के अन्य देशों में भी डर का माहौल है क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि यदि युद्ध और फैला, तो उनके तेल भंडार और नागरिक क्षेत्र भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा अब खतरे में है। साथ ही, तेल की कीमतों में वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और प्रभावित भारतीयों को हर संभव मदद पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।
निष्कर्षतः, अमेरिका और ईरान के बीच का यह शक्ति प्रदर्शन पूरी दुनिया को एक बड़े संकट की ओर धकेल रहा है। ट्रम्प की ‘धरती से मिटा देने’ की धमकी और ईरान के ड्रोन हमलों ने कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जल्द ही हस्तक्षेप नहीं करती हैं, तो यह स्थानीय संघर्ष एक वैश्विक ऊर्जा संकट और बड़े मानवीय नुकसान में बदल सकता है।

