केरल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने राज्य की राजनीतिक दिशा बदल दी है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इस एकतरफा जीत ने पिछले 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को मात्र 35 सीटों पर समेट दिया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन की इस लहर ने कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल तो पैदा किया है, लेकिन इसके साथ ही मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर आंतरिक कलह और दावेदारी की जंग भी तेज हो गई है।
सत्ता की इस धमाकेदार वापसी के साथ ही मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख चेहरों—केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला कड़ा हो गया है। पार्टी के भीतर की यह खींचतान अब सार्वजनिक होने लगी है, जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘महाभारत’ का नाम दिया जा रहा है। तिरुवनंतपुरम की सड़कों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक अपने-अपने पसंदीदा नेताओं के समर्थन में पोस्टर वार शुरू हो चुका है और लॉबिंग के लिए बड़े नेताओं का जमावड़ा अब दिल्ली में जुटने लगा है।
इस रेस में सबसे आगे केसी वेणुगोपाल का नाम चर्चा में है। संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ और गांधी परिवार (हाई कमान) के बेहद करीबी होने के कारण उन्हें सबसे शक्तिशाली दावेदार माना जा रहा है। वेणुगोपाल फिलहाल विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपना पलड़ा भारी करने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, वे हाई कमान से सीधे संवाद करने के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं ताकि विधायक दल की बैठक से पहले अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।
दूसरी ओर, वीडी सतीशन को एक जनप्रिय और आक्रामक नेता के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से उन्होंने एलडीएफ सरकार की नीतियों को घेरा और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाया, उसने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया। यही कारण है कि राज्य के युवा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच उनका समर्थन सबसे अधिक दिख रहा है। सतीशन के समर्थकों का तर्क है कि इस बड़ी जीत का श्रेय उनके संघर्ष को जाता है, इसलिए नेतृत्व उन्हीं के पास होना चाहिए।
अनुभव के मामले में रमेश चेन्निथला का पक्ष काफी मजबूत है। वे पूर्व में भी सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के साथ उनके मधुर संबंध और उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक सुरक्षित विकल्प बनाती है। चेन्निथला के समर्थक उन्हें एक ऐसे ‘स्थिर’ चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं, जो गठबंधन सरकार को बिना किसी आंतरिक विवाद के पांच साल तक सफलतापूर्वक चला सकते हैं।
फिलहाल केरल की राजनीति का केंद्र बिंदु अब ‘हाई कमान’ का निर्णय बन गया है। कांग्रेस आलाकमान ने पर्यवेक्षकों की एक टीम तैनात की है जो नवनिर्वाचित विधायकों की राय लेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक और दिल्ली में होने वाली शीर्ष स्तर की चर्चा के बाद ही लगेगी। तब तक केरल में पोस्टर वार और गुटबाजी का यह दौर थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
यह जीत कांग्रेस के लिए जितनी बड़ी संजीवनी है, मुख्यमंत्री का चयन उतनी ही बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान संगठन की शक्ति (वेणुगोपाल), जनता का आक्रोश (सतीशन) या अनुभव की स्थिरता (चेन्निथला) में से किसे प्राथमिकता देता है। केरल की जनता और राजनीति के जानकार अब सांसें थामकर अगले कुछ घंटों में होने वाले आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।

