दिल्ली में इस साल मच्छर जनित बीमारियों ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंताएँ बढ़ गई हैं। दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 के महीने में डेंगू के 52 मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले पांच वर्षों में इसी अवधि के दौरान दर्ज किए गए मामलों में सबसे अधिक है, जो राजधानी में एक खतरनाक रुझान की ओर इशारा कर रही है।
आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण करें तो पता चलता है कि डेंगू का प्रसार हर साल बढ़ता जा रहा है। साल 2022 में अप्रैल तक केवल 12 मामले थे, जो 2023 में 24, 2024 में 31 और 2025 में 42 तक पहुँच गए थे। इस साल दर्ज किए गए 52 मामले यह स्पष्ट करते हैं कि शुरुआती मौसम में ही संक्रमण की तीव्रता काफी अधिक है। साल 2026 के पहले चार महीनों का कुल आंकड़ा अब 107 तक पहुँच गया है, जो आने वाले मानसून के सीजन के लिए खतरे की घंटी है।
मलेरिया की स्थिति पर नजर डालें तो इस साल अप्रैल तक 29 मामले सामने आए हैं। हालांकि, यह संख्या पिछले साल (2025) के 39 मामलों की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन साल 2023 के 15 मामलों के मुकाबले यह अब भी लगभग दोगुनी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल के दौरान हुई रुक-रुक कर बारिश ने मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है, जिससे मामलों में यह अनपेक्षित उछाल देखने को मिल रहा है।
बढ़ते खतरों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम ने अपने जमीनी अभियान को काफी तेज कर दिया है। 2 मई तक के आंकड़ों के अनुसार, निगम के कर्मचारियों ने दिल्ली के लगभग 12.15 लाख घरों का व्यापक निरीक्षण किया है। यह पिछले सालों के मुकाबले कहीं बड़ा अभियान है। इस सघन चेकिंग का मुख्य उद्देश्य घरों के भीतर कूलर, गमलों और छतों पर जमा पानी में पनपने वाले मच्छरों के लार्वा को पहचानना और उन्हें नष्ट करना है।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि करीब 15,649 घरों में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं। यह स्थिति लगभग पिछले साल जैसी ही गंभीर बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि जन-जागरूकता के बावजूद कई क्षेत्रों में लापरवाही बरती जा रही है। निगम ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए 16,261 कानूनी नोटिस जारी किए हैं और 1,712 मामलों में कोर्ट की कार्रवाई (अभियोजन) शुरू की है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसी जा सके।
मच्छर नियंत्रण के लिए इस बार पारंपरिक फॉगिंग के साथ-साथ वैज्ञानिक और जैविक तरीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। MCD ने दिल्ली के विभिन्न जल निकायों और जमा पानी वाले क्षेत्रों में ‘गप्पी’ मछलियों का उपयोग शुरू किया है। लगभग 1.04 लाख रुपये की लागत से 358 ‘गप्पी-8’ हस्तक्षेप किए गए हैं। ये मछलियाँ पानी में मच्छरों के लार्वा को खा जाती हैं, जिससे रसायनों के बिना ही मच्छरों की आबादी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब मानसून की तैयारियों में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है, जो डेंगू और मलेरिया के मामलों को और अधिक बढ़ा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा रही है और वहाँ फॉगिंग व लार्वा-रोधी छिड़काव की फ्रीक्वेंसी को बढ़ाया जा रहा है। निर्माण स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है जहाँ पानी जमा होने की संभावना अधिक होती है।
अंततः, स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस लड़ाई में प्रशासन का सहयोग करें। डेंगू और मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पैदा होने से रोकना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सप्ताह में कम से कम एक बार अपने कूलर का पानी बदलें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और छतों पर रखे कबाड़ या टायरों में पानी जमा न होने दें। प्रशासन का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी के बिना इन बीमारियों पर पूर्ण नियंत्रण पाना संभव नहीं है।

