सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार सीमा पार पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस संयुक्त ऑपरेशन के दौरान अब तक कुल 9 संदिग्ध गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह न केवल हथियारों की तस्करी में शामिल था, बल्कि भारत के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क विस्तार की गहरी साजिश रच रहा था।
पकड़े गए आरोपियों के पास से 18 आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य अवैध हथियारों की एक बड़ी खेप को भारत के विभिन्न हिस्सों में फैलाना था। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी सिंडिकेट के रूप में देख रही हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता था।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के खुर्जा से ताल्लुक रखने वाले शाहबाज अंसारी की भूमिका प्रमुखता से उभर कर आई है। शाहबाज अंसारी पहले से ही राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) का वांछित आरोपी है और उसका नाम सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी हथियार सप्लाई करने के मामले में सामने आ चुका है। एजेंसियां फिलहाल इस कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं कि शाहबाज इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ किस स्तर पर और किन विदेशी आकाओं के इशारे पर काम कर रहा था।
जांच के दौरान हथियारों की तस्करी के एक पुराने और कुख्यात रूट का भी खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह बिहार के मुंगेर के रास्ते हथियारों को देश के अलग-अलग राज्यों में पहुंचाने की योजना बना रहा था। मुंगेर से शुरू होने वाली यह सप्लाई चेन देश के संवेदनशील इलाकों तक हथियार पहुंचाने का एक बड़ा जरिया बनने वाली थी, जिसे समय रहते सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया है।
इसी कड़ी में यूपी एटीएस ने नोएडा से दो कथित गैंगस्टरों, तुषार चौहान (उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान) और समीर खान को गिरफ्तार किया है। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद मामले में एक बड़ा मोड़ आया है, क्योंकि इनके सीधे संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से होने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय नहीं थे, बल्कि डिजिटल माध्यमों से विदेशी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे।
आरोपियों से पूछताछ में यह भी पता चला है कि वे इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल करने के लिए कर रहे थे। इनका उद्देश्य देश में स्लीपर सेल तैयार करना और संवेदनशील स्थानों की रेकी कर टारगेट किलिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देना था। सुरक्षा एजेंसियों ने अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी निगरानी पहले से कहीं अधिक सख्त कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम को 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पिछले वर्ष हुए उस भीषण हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की मौत हुई थी। एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन इस बरसी के आसपास देश में दहशत फैलाने की फिराक में थे, जिसे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने विफल कर दिया है।
फिलहाल, एटीएस और एनआईए जैसी एजेंसियां पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही हैं ताकि इनके नेटवर्क के अन्य सदस्यों और छिपे हुए ठिकानों का पता लगाया जा सके। इस मामले में शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट जैसे नामों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की पूरी परतें खुलेंगी।

