छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ। विपक्ष (कांग्रेस) ने SIR के दौरान करीब 19 लाख मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से हटाए जाने का आरोप लगाया और सदन की कार्यवाही रोककर इस पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और विधायक उमेश पटेल ने इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटना लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है, लेकिन सरकार और पुलिस इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। विपक्ष का आरोप था कि कुछ राजनीतिक दलों के इशारे पर जानबूझकर नाम काटे गए हैं।
सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इन आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तर्क दिया कि मतदाता सूची का कार्य संवैधानिक संस्थाओं के अधीन है और इसमें राज्य सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं होती, इसलिए इस विषय पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती।
दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी और हंगामे के बाद सभापति धरम लाल कौशिक ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे नाराज होकर कांग्रेस के सभी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सदन की कार्यवाही से वॉकआउट किया।

