लोरमी। मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र से स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ बोड़तरा-पथर्रा मार्ग पर भारी मात्रा में सरकारी दवाइयां लावारिस हालत में खुले में फेंकी हुई पाई गई हैं। इन दवाओं पर ‘छत्तीसगढ़ शासन’ का स्पष्ट लोगो लगा हुआ है, जिससे यह साफ है कि ये दवाइयां सरकारी अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क वितरण के लिए थीं। मामला उजागर होते ही जिला स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है और स्थानीय ग्रामीणों में भी आक्रोश देखा जा रहा है।
सड़क किनारे इस तरह दवाओं का अंबार मिलना न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि यह क्षेत्र के मासूम बच्चों और बेजुबान पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता था। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई बच्चा या पशु अनजाने में इन दवाओं का सेवन कर लेता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। इसके अलावा, दवाओं के निस्तारण के लिए निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का पालन न करना पर्यावरण और स्थानीय जल स्रोतों के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करता है।
घटना की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. शीला शाहा ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का स्वयं मुआयना किया और दवाओं के इस तरह फेंके जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। डॉ. शाहा ने लोरमी के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) को मामले की बारीकी से जांच करने और जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दवाओं का यह जत्था किस स्वास्थ्य केंद्र को आवंटित किया गया था।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां खुले में कैसे पहुंचीं। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया है कि ब्लॉक स्तर के दवा भंडारों के स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जाएगा ताकि दोषी सेंटर की पहचान हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दवाइयों के निस्तारण के नियमों का उल्लंघन करने वाले और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस घटना ने जिले में दवाओं के भंडारण और प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है।

