रायपुर, 28 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और उनके सर्वांगीण कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक अत्यंत मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है। इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी ढंग से क्रियान्वित की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के बुजुर्गों को आर्थिक और मानसिक संबल मिल रहा है।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं रह गई है। केवल आधार कार्ड और अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से ही आयु और पात्रता का सत्यापन किया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुलभ हो गई है।
निराश्रित और असहाय बुजुर्गों के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम किसी वरदान से कम नहीं हैं। वर्तमान में इन आश्रमों में लगभग 675 वृद्धजन निवास कर रहे हैं, जहाँ उन्हें न केवल सुरक्षित आवास मिल रहा है, बल्कि निःशुल्क पौष्टिक भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सुविधाएँ भी दी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बुजुर्ग खुद को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे और उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन प्राप्त हो।
गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे बुजुर्गों के लिए सरकार ने ‘पैलिएटिव केयर’ (प्रशामक गृह) की विशेष व्यवस्था की है। प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ और कबीरधाम जैसे जिलों में 13 ऐसे केंद्र संचालित हैं, जहाँ बिस्तर पर आश्रित 140 वरिष्ठ नागरिकों की निरंतर देखभाल की जा रही है। इन केंद्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ और भावनात्मक सहयोग प्रदान किया जाता है, ताकि कठिन शारीरिक स्थिति में भी उन्हें मानवीय गरिमा के साथ उपचार मिल सके।
आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन प्रदान कर रही है। बीपीएल और एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को जहाँ 500 रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, वहीं 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए यह राशि 680 रुपए तय की गई है। यह पेंशन राशि वृद्धजनों को अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी से बचाती है और उनके आत्मसम्मान को बढ़ाती है।
वरिष्ठ नागरिकों की शारीरिक अक्षमता को दूर करने के लिए ‘सहायक उपकरण प्रदाय योजना’ को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे आने वाले 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को व्हीलचेयर, वॉकर, श्रवण यंत्र, चश्मा और ट्राइसाइकिल जैसे उपकरण दिए जाते हैं। चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर प्रति व्यक्ति अधिकतम 6900 रुपए तक की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनकी दैनिक गतिशीलता आसान हो गई है।
वृद्धजनों के मानसिक और आध्यात्मिक संतोष के लिए सरकार की तीर्थ यात्रा योजना एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है। देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराकर बुजुर्गों को मानसिक शांति प्रदान की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 14 यात्राओं के माध्यम से 10,694 हितग्राही लाभान्वित हो चुके हैं। यह पहल बुजुर्गों को जीवन के इस पड़ाव पर नई खुशियाँ और सामाजिक जुड़ाव प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की इन सभी योजनाओं का मूल उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय रखना है। सरकार मानती है कि बुजुर्गों का अनुभव और उनका मार्गदर्शन समाज की उन्नति के लिए आवश्यक है। इसी सोच के साथ पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल और आवास जैसी सुविधाओं को एक एकीकृत प्रणाली के तहत जोड़ा गया है।
अंततः, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य बनकर उभर रहा है जहाँ बुजुर्गों का आशीर्वाद राज्य की प्रगति की बुनियाद माना जाता है। भविष्य में इन कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार की भी योजना है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक सुरक्षित, स्वस्थ और गौरवान्वित महसूस कर सके। राज्य का यह संवेदनशील दृष्टिकोण अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण पेश कर रहा है।

