राजधानी रायपुर में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने शहर के गंज और राजेंद्र नगर थाना क्षेत्रों में दबिश देकर तीन फर्जी कॉल सेंटरों को सील किया है। इन कॉल सेंटरों के जरिए सात समंदर पार बैठे विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाया जाता था। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने करीब 40 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनसे फिलहाल सघन पूछताछ की जा रही है।
डीसीपी सेंट्रल जोन उमेश गुप्ता ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ये फर्जी कॉल सेंटर पूरी तरह से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका (USA) और यूरोप के लोगों को ठगने के लिए डिजाइन किए गए थे। पकड़े गए आरोपियों में से ज्यादातर लोग गुजरात, बिहार और उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के रहने वाले हैं। इन युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये की मासिक सैलरी पर ठगी के काम में लगाया गया था।
ठगी करने का इनका तरीका बेहद शातिर था। ये गिरोह मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों को कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का लालच देकर उनके साथ धोखाधड़ी करता था। इसके अलावा, गिरोह के सदस्य खुद को अमेज़न और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों के ‘कस्टमर केयर रिप्रेजेंटेटिव’ बताकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। वे तकनीकी खराबी दूर करने या रिफंड दिलाने के बहाने विदेशी नागरिकों के बैंक खातों तक पहुंच बना लेते थे।
इस गैंग की एक विशेष रणनीति यह भी थी कि वे इंटरनेट पर अपने फर्जी कस्टमर केयर नंबरों को गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखाते थे। जब भी कोई अमेरिकी या यूरोपीय नागरिक मदद के लिए इन नंबरों पर कॉल करता, तो कॉल सीधे रायपुर के इन फर्जी सेंटरों में लैंड होती थी। इसके बाद आरोपी पेशेवर लहजे में बात कर उन्हें झांसे में ले लेते और उनकी मेहनत की कमाई पर डाका डालते थे।
ठगी का यह पूरा खेल भारतीय समय के अनुसार रात में खेला जाता था। चूंकि अमेरिका और भारत के समय में बड़ा अंतर है, इसलिए यह गिरोह शाम 7:30 बजे अपना काम शुरू करता था और पूरी रात सक्रिय रहता था। रात के समय वहां दिन होने के कारण नागरिक आसानी से इनके कॉल उठाते थे या मदद के लिए इन्हें संपर्क करते थे, जिससे आरोपियों को ठगी करने में आसानी होती थी।
पुलिस की इस छापेमारी में भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए हैं। मौके से 20 लैपटॉप, 50 डेस्कटॉप कंप्यूटर और 50 से अधिक मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों के जरिए पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अब तक कितने विदेशी नागरिकों से कितने करोड़ की ठगी की जा चुकी है और इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है।
यह मामला साइबर अपराध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है, जहाँ स्थानीय स्तर पर बैठकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस अब हिरासत में लिए गए आरोपियों के बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाल रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुँचा जा सके।

