रायपुर। असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने दौरे से लौटते ही प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। मीडिया से चर्चा करते हुए बघेल ने दावा किया कि असम की जनता वर्तमान हिमंता बिस्वा सरमा सरकार और भाजपा की नीतियों से पूरी तरह ऊब चुकी है। उन्होंने कहा कि वहां की जनता अब ‘नया असम’ गढ़ने का मन बना चुकी है और पूरे राज्य में सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट लहर दिखाई दे रही है।
बघेल ने भाजपा सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि हार के डर से हिमंता सरकार अब दमनकारी नीतियों पर उतर आई है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर लगातार हो रही एफआईआर और पवन खेड़ा के आवास पर पुलिस की छापेमारी को सत्ता की बौखलाहट करार दिया। बघेल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी भाजपा के इन डराने-धमकाने वाले हथकंडों से पीछे हटने वाली नहीं है और मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी।
चुनावी वादों पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के असम दौरे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह वहां गाय बांटने का वादा कर रहे हैं, जबकि यह प्रयोग 2003 में छत्तीसगढ़ में पूरी तरह विफल साबित हो चुका है। बघेल के अनुसार, भाजपा के पास जनता को देने के लिए अब कोई नया विजन नहीं बचा है। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा तंत्र भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा हुआ है।
जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बघेल ने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाएं अब एकतरफा काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा दिए गए गंभीर शिकायतों (जैसे तीन फर्जी पासपोर्ट और विदेशों में अवैध संपत्ति) पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि जब चुनाव आचार संहिता लागू है, तब भी रायपुर में रात को एफआईआर होती है और सुबह असम पुलिस दिल्ली पहुंच जाती है, जो एजेंसियों के दुरुपयोग का जीता-जागता प्रमाण है।
अंत में, बघेल ने दोहराया कि असम की जनता भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ खड़ी हो गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ की जनता ने अतीत में बदलाव का मार्ग चुना था, उसी प्रकार असम में भी कांग्रेस गठबंधन की मजबूत वापसी होगी और भाजपा का “डबल इंजन” का दावा धराशायी हो जाएगा।

