रायपुर, 30 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से बीते 2 साल 4 माह के कार्यकाल में प्रदेश के लाखों श्रमिकों को लगभग 800 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में हस्तांतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि राज्य के विकास में पसीना बहाने वाले श्रमिकों का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण ही प्रदेश की असली प्रगति है।

श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले तीनों प्रमुख मंडलों—भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल, और श्रम कल्याण मंडल—के माध्यम से योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार की इन नीतियों का उद्देश्य न केवल श्रमिकों को तत्काल आर्थिक राहत पहुँचाना है, बल्कि उनके परिवार के भविष्य को भी सुरक्षित करना है। इसी कड़ी में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को 256 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सरकार ने ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ की शुरुआत की है। इस वर्ष इस योजना के तहत श्रमिक परिवारों के 200 प्रतिभाशाली बच्चों को राज्य के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा। इसका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने इस पर जोर देते हुए कहा कि “विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा,” बल्कि वह बेहतर शिक्षा पाकर समाज की मुख्यधारा में बराबरी से खड़ा होगा।

श्रमिकों के बच्चों के लिए अन्य शैक्षणिक योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना और निःशुल्क गणवेश व पुस्तक सहायता राशि योजना भी सुचारू रूप से संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए ‘उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना’ के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।
श्रमिकों के बुनियादी सम्मान और स्वास्थ्य के लिए ‘शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ मील का पत्थर साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 38 केंद्रों पर मात्र 5 रुपये में श्रमिकों को पौष्टिक गरम भोजन (दाल-चावल, सब्जी, अचार) उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने इस वर्ष इस योजना का विस्तार सभी जिलों में करने का निर्णय लिया है, ताकि कोई भी श्रमिक भूखा न रहे।
आवास और परिवहन की दिशा में भी सरकार ने बड़ी वृद्धि की है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत मिलने वाली राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 1.50 लाख रुपये कर दिया गया है। इसी तरह, श्रमिकों के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ई-रिक्शा सहायता राशि को भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये करने का प्रावधान किया गया है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
1 मई को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन श्रमिकों के संघर्ष और उनके अधिकारों के प्रति संकल्प लेने का है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में श्रमिकों ने ‘8 घंटे काम’ की मांग के लिए बलिदान दिया था, जिसके बाद 1889 में इस दिवस की औपचारिक घोषणा हुई थी।
भारत में मजदूर दिवस के इतिहास और डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को भी इस अवसर पर विशेष रूप से याद किया गया। भारत में इसकी शुरुआत 1923 में चेन्नई से हुई थी। बाबा साहेब अंबेडकर ने ही श्रमिकों के काम के घंटे 12 से घटाकर 8 करने और महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) जैसी अनिवार्य सुविधाओं को लागू करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रही है।

प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते हुए औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण किया जाए ताकि कहीं भी श्रमिकों के अधिकारों का हनन न हो। सरकार का विजन ‘हर हाथ को काम और हर काम का उचित दाम’ सुनिश्चित करना है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप है।
पंजीकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो 5 सितंबर 2008 से अब तक राज्य में 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। मंडल द्वारा कुल 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वित्तीय मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025-26 में ही उपकर (Cess) के माध्यम से 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जबकि अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित किया जा चुका है।
स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के लिए 76.38 करोड़ रुपये और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार केवल नारे नहीं, बल्कि धरातल पर ऐसी व्यवस्था बना रही है जहाँ श्रमिक वर्ग स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके।

