नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ के डिजिटल नवाचार को एक नई ऊंचाई देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘सेवा सेतु’ पोर्टल का भव्य लोकार्पण किया। यह पोर्टल छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा विकसित किया गया है, जो ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना का एक आधुनिक और उन्नत संस्करण है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस डिजिटल क्रांति को सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य ने वर्ष 2003 में ‘चॉइस’ मॉडल से अपनी डिजिटल यात्रा शुरू की थी, जो आज ‘सेवा सेतु’ के रूप में एक सशक्त वटवृक्ष बन चुकी है। अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के माध्यम से नागरिक सेवाएं सीधे उनके मोबाइल तक पहुंचेंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह प्लेटफॉर्म पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने में मील का पत्थर साबित होगा।
‘सेवा सेतु’ पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है, जिसमें अब एक ही जगह पर 441 शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें आय, जाति, निवास, राशन कार्ड और विवाह पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्र शामिल हैं। पोर्टल की उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। प्रशासन को अधिक सुलभ बनाने के लिए इसमें 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे यह नागरिकों के लिए सही मायने में “वन स्टॉप सॉल्यूशन” बन गया है।
तकनीकी मोर्चे पर, यह पोर्टल व्हाट्सएप इंटरफेस के साथ एकीकृत है, जिससे आम नागरिक अपनी स्थानीय भाषा में आवेदन कर सकेंगे और सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर सकेंगे। वर्तमान में 25 सेवाओं के लिए व्हाट्सएप सुविधा शुरू की गई है, जिसे जल्द ही सभी सेवाओं के लिए विस्तारित किया जाएगा। ‘भाषिणी’ तकनीक के उपयोग से यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा पूरी तरह समाप्त हो गई है और प्रदेश का हर व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सेवाओं का लाभ ले पा रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के प्रावधानों को पोर्टल में डिजिटल रूप से लागू किया गया है। इसमें ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि यदि कोई अधिकारी तय समय-सीमा में सेवा प्रदान नहीं करता, तो उस पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, आधार आधारित ई-केवाईसी और डिजिलॉकर के एकीकरण ने पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सरल बना दिया है।

वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी बनाने के लिए सेवा सेतु में ट्रेजरी और ई-चालान का रीयल-टाइम एकीकरण किया गया है। अब नागरिक ऑनलाइन भुगतान कर तत्काल डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकते हैं और डीबीटी (DBT) के माध्यम से मिलने वाले लाभों की ट्रैकिंग सीधे अपने फोन पर कर सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर प्रमाण-पत्र पर क्यूआर कोड दिया गया है, जिससे उनकी सत्यता की जांच कहीं भी आसानी से की जा सकती है। यह तकनीक न केवल फर्जीवाड़े को रोकेगी बल्कि दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की जरूरत को भी कम करेगी।
अंत में, राज्य सरकार ने इस डिजिटल ढांचे को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक विशाल नेटवर्क तैयार किया है। प्रदेश में 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर, 1000 से अधिक चॉइस सेंटर और 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक भी बिना किसी तकनीकी कठिनाई के सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़ सकेंगे। इस लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस नई व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन का संकल्प लिया।

