छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य की जलवायु परिवर्तन स्टियरिंग समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जलवायु परिवर्तन के खतरों को देखते हुए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को इसके अनुकूल बनाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अब प्रत्येक ग्राम पंचायत के स्तर पर जलवायु परिवर्तन की विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने बैठक में एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव भी रखा, जिसके तहत राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) मद की उपलब्ध राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सहभागिता से पर्यावरण संतुलन के लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज्य में ‘कार्बन क्रेडिट’ आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (ISFR) 2025 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष-आवरण में 683 किलोमीटर की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सघन वृक्षारोपण अभियानों का परिणाम मानी जा रही है।
वृक्षारोपण अभियानों का विवरण देते हुए बताया गया कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना के तहत प्रदेश में करीब 7 करोड़ पौधे रोपे जा चुके हैं। इसी तरह, ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण का लक्ष्य पूरा किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करना और पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना भी है।
जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए राज्य सरकार भविष्योन्मुखी तकनीकों पर भी जोर दे रही है। बैठक में बताया गया कि जन-सामान्य को ई-वाहनों (इलेक्ट्रिक वाहनों) के उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है और कृषि क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए किसानों को बड़ी संख्या में सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
कृषि क्षेत्र में बदलाव का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य में जैविक खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई है। इसके अलावा, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए 300 से अधिक बांधों की हाइड्रोलॉजिकल प्लानिंग की जा रही है और 24 प्रमुख जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे भी पूर्ण कर लिया गया है, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।
राज्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए ‘जलवायु परिवर्तन ज्ञान केंद्र’ के निर्माण पर भी चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने एक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के कारकों और छत्तीसगढ़ पर इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय रहते उचित कदम न उठाने पर कृषि और जल स्रोतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों के सचिव और विशेषज्ञ शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। बैठक में नाबार्ड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने भी तकनीकी सुझाव दिए।
अंततः, मुख्य सचिव ने सभी विभागीय सचिवों को समन्वय के साथ काम करने और जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में पीसीसीएफ श्री श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा सहित मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। यह बैठक स्पष्ट करती है कि छत्तीसगढ़ सरकार अब पर्यावरण सुरक्षा को विकास का मुख्य केंद्र मानकर चल रही है।

