असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में अपनी हैट्रिक पूरी की है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और रुझानों के अनुसार, 126 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी गठबंधन 101 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है, जिसने विपक्ष के तमाम दावों को ध्वस्त कर दिया है।
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की जालुकबारी सीट की रही। हिमंता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह क्षेत्र भाजपा का अभेद्य किला है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी, कांग्रेस की विदिशा नेगी को 89,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। पिछले 25 वर्षों से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हिमंता के लिए यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि उनके विकास मॉडल और नेतृत्व पर जनता की गहरी मुहर मानी जा रही है।
दूसरी ओर, जोरहाट विधानसभा सीट से आए परिणामों ने कांग्रेस को सबसे गहरा जख्म दिया है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई को इस सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के अनुभवी नेता और पांच बार के विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी सीट सुरक्षित रखी। गोस्वामी को कुल 69,439 वोट मिले, जबकि गोगोई इस भाजपा की आंधी में अपनी पैठ बनाने में असफल रहे।
विपक्ष के लिए यह चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन मात्र 21 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। 2021 के चुनाव में विपक्ष ने 50 सीटें हासिल कर कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन इस बार ‘महाजोत’ का गणित पूरी तरह फेल साबित हुआ। कांग्रेस के अलावा बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF और अन्य क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिससे स्पष्ट है कि राज्य में ध्रुवीकरण और विकास की राजनीति ने विपक्ष के गठबंधन को हाशिए पर धकेल दिया है।
अगर पिछले विधानसभा चुनाव (2021) से तुलना करें, तो बीजेपी ने इस बार अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। 2021 में बीजेपी ने अकेले 60 सीटें जीती थीं और गठबंधन ने कुल 75 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। हालांकि, 2026 के इन रुझानों में बीजेपी गठबंधन ने 100 का आंकड़ा पार कर विपक्ष को पूरी तरह अप्रासंगिक बना दिया है। गठबंधन के सहयोगी दलों, असम गण परिषद (AGP) और UPPL ने भी अपने-अपने गढ़ों में बेहतर प्रदर्शन किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी जीत के पीछे हिमंता बिस्वा सरमा की जनहितैषी योजनाएं और बुनियादी ढांचे का विकास मुख्य कारक रहे हैं। राज्य में शांति व्यवस्था और उग्रवाद की समाप्ति जैसे मुद्दों ने भी मतदाताओं को बीजेपी की ओर आकर्षित किया। इसके साथ ही, विपक्ष के पास मुख्यमंत्री पद के लिए कोई ठोस चेहरा न होना और संगठनात्मक कमजोरी कांग्रेस की इस शर्मनाक हार का एक बड़ा कारण बनकर उभरी है।
चुनाव परिणामों के बीच राज्यभर में भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। गुवाहाटी से लेकर जोरहाट तक ढोल-नगाड़ों और अबीर-गुलाल के साथ जीत का उत्सव मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस जीत को असम की जनता की जीत बताते हुए सोशल मीडिया पर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और असम की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम बताया है।
कुल मिलाकर, 2026 के इन चुनावी नतीजों ने असम में विपक्ष की राजनीति को एक बड़े आत्मचिंतन की ओर धकेल दिया है। गौरव गोगोई जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता की हार और भाजपा की सीटों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि असम में फिलहाल ‘हिमंता युग’ का दबदबा कायम रहने वाला है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपनी इस प्रचंड जीत को अगले पांच वर्षों के शासन में किस तरह भुनाती है।

