बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया दिल्ली दौरे ने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी है। दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई सम्राट चौधरी की मैराथन बैठकों के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि कैबिनेट विस्तार का खाका तैयार हो चुका है। इस दौरे को न केवल सांगठनिक दृष्टिकोण से, बल्कि राज्य के आगामी विकास और राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्राट चौधरी ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान देश के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर बिहार के भविष्य का रोडमैप साझा किया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर राज्य में सुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ “विकसित बिहार” के विजन पर चर्चा हुई। इन मुलाकातों का उद्देश्य केवल मंत्रिमंडल की सूची फाइनल करना ही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच विकास की योजनाओं में बेहतर समन्वय स्थापित करना भी रहा।
विकास की गति को धार देने के लिए सम्राट चौधरी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात की। वित्त मंत्री के साथ बिहार की आर्थिक प्रगति और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर विस्तृत मंथन हुआ, जबकि रेल मंत्री के साथ प्रदेश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी सुधार को लेकर बातचीत की गई। इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और कृषि क्षेत्र में उर्वरक उपलब्धता जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर बिहार के जमीनी मुद्दों को केंद्र के समक्ष रखा गया।
कैबिनेट विस्तार के संभावित स्वरूप की बात करें तो सूत्रों के अनुसार, भाजपा और जेडीयू के बीच ’16-16′ मंत्रियों का फॉर्मूला तय होने की प्रबल संभावना है। इस फॉर्मूले के तहत दोनों प्रमुख दल समान भागीदारी के साथ सरकार चलाएंगे। विभागों के बंटवारे को लेकर भी सहमति बनने की खबरें हैं, जिसमें मुख्यमंत्री के पास रहे कुछ पुराने विभाग भाजपा कोटे में जा सकते हैं, जबकि जेडीयू कोटे के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्रियों और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों को दी जा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल में नए चेहरों और अनुभवी नेताओं का अनूठा संगम देखने को मिल सकता है। भाजपा अपने कोटे से कई युवा और प्रभावी चेहरों को मौका देकर भविष्य की राजनीति के लिए एक नई लीडरशिप तैयार करना चाहती है। साथ ही, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की जाएगी, ताकि समाज के हर वर्ग को सरकार में प्रतिनिधित्व मिल सके।
सहयोगी दलों के साथ तालमेल बिठाने के लिए सम्राट चौधरी ने जीतन राम मांझी, ललन सिंह और चिराग पासवान के करीबी नेताओं से भी संपर्क साधा है। एनडीए के सभी घटकों को विश्वास में लेकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है। दिल्ली में हुई इन हाई-लेवल बैठकों के बाद अब केवल राज्यपाल से समय लेने और शपथ ग्रहण की तारीख की औपचारिक घोषणा होना ही बाकी रह गया है।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी के दिल्ली दौरे ने बिहार सरकार के आगामी स्वरूप की धुंधली तस्वीर को काफी हद तक साफ कर दिया है। 15 अप्रैल को सरकार गठन के बाद से जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब दूर होती दिख रही है। अब बिहार की जनता की नजरें पटना पर टिकी हैं, जहां जल्द ही नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है, जिससे राज्य में सुशासन और विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है।

