छत्तीसगढ़ सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए इस वर्ष भी “सुशासन तिहार 2026” के आयोजन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की असली पहचान है, इसलिए इस वर्ष अभियान को पिछले साल की तुलना में अधिक व्यापक और जन-केंद्रित बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों को पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कलेक्टरों को कड़े निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल 2026 तक जिलों में जितने भी पुराने मामले लंबित हैं, उन्हें विशेष अभियान चलाकर प्राथमिकता से निपटाया जाए। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से किसी भी नागरिक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
अभियान के पहले चरण में राजस्व और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से भूमि संबंधी मामले जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन शामिल हैं। इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं जैसे मनरेगा मजदूरी का भुगतान, आय-जाति प्रमाण पत्र जारी करना, बिजली के ट्रांसफार्मर बदलना और हैंडपंपों की मरम्मत जैसे कार्यों को प्राथमिकता की सूची में रखा गया है ताकि ग्रामीण जीवन सुचारू रूप से चल सके।
“सुशासन तिहार” का मुख्य आकर्षण 01 मई से 10 जून 2026 तक आयोजित होने वाले जन समस्या निवारण शिविर होंगे। ये शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 पंचायतों के समूह पर और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर लगाए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य सरकारी तंत्र को सीधे जनता के दरवाजे तक ले जाना है, जहाँ पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि इन शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों का निराकरण अधिकतम एक माह के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी जाए। इस प्रक्रिया में उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
अभियान की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न जिलों का औचक निरीक्षण करेंगे। वे न केवल विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे, बल्कि सीधे जनता से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक भी लेंगे। इसके साथ ही मंत्रीगण, सांसद, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी विभिन्न शिविरों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे, जिससे शासन और प्रशासन की जवाबदेही जमीनी स्तर पर सुनिश्चित हो सके।
निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री जिला मुख्यालयों में समीक्षा बैठकें करेंगे और प्रेस वार्ता के माध्यम से प्रगति की जानकारी साझा करेंगे। इस दौरान वे विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों से भेंट कर उनके बहुमूल्य सुझाव भी प्राप्त करेंगे। सरकार की योजना इस अभियान को केवल प्रशासनिक कार्य तक सीमित न रखकर इसे एक जन-भागीदारी वाले कार्यक्रम में बदलने की है, जिससे लोक कल्याण के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
अंत में, जनसंपर्क विभाग और जिला प्रशासन को इस अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे इस अभियान को एक ‘जन आंदोलन’ का स्वरूप दें। प्रभावी संचार माध्यमों के उपयोग से अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ का हर नागरिक सुशासन का वास्तविक अनुभव कर सके।

