हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषकों ने भारत की कूटनीति की जमकर सराहना की है। पश्चिमी और एशियाई मीडिया का मानना है कि इस बार के सम्मेलन में भारत ने अत्यंत कौशल का परिचय देते हुए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। सम्मेलन के दौरान भारत ने अपने कूटनीतिक संतुलन के दम पर उन देशों के बीच भी आम सहमति बनाने में सफलता पाई, जिनके आपसी भू-राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारत ने इस मंच को किसी भी स्थिति में पश्चिमी देशों या विशेषकर अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने वाले गुट में तब्दील नहीं होने दिया। जहां कुछ सदस्य देश ब्रिक्स को अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के विकल्प या एक आक्रामक मोर्चे के रूप में देखना चाहते थे, वहीं भारत ने इसे निष्पक्ष और रचनात्मक बनाए रखा। इस रणनीतिक रुख के कारण ब्रिक्स का स्वरूप किसी ध्रुवीकरण का हिस्सा बनने के बजाय विकासशील देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास का मंच बनकर उभरा है।
सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ या संबंधित आम सहमति वाला दस्तावेज रहा, जिसे तैयार करना आसान नहीं था। ब्रिक्स में शामिल नए और पुराने सदस्यों के बीच पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक शासन सुधार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहरे मतभेद थे। इसके बावजूद, भारतीय कूटनीतिज्ञों ने सभी पक्षों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा और अंततः एक ऐसा दस्तावेज स्वीकार कराया जिस पर सभी देशों की मुहर लगी।
भारत ने इस मंच का उपयोग ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को बुलंद करने के लिए प्रमुखता से किया। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दिलाकर भारत ने यह साबित कर दिया कि यह समूह केवल राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान देने वाला संगठन है। दुनिया भर के प्रमुख अखबारों ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित किया है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी ब्रिक्स मंच से एक बहुत कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया गया। भारत की कूटनीतिक पहल के कारण घोषणापत्र में आतंकवाद और इसके वित्तपोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया गया। वैश्विक मीडिया ने इसे भारत की एक बड़ी वैचारिक और कूटनीतिक जीत करार दिया, क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक साझा सहमति बनाना हमेशा से एक जटिल चुनौती रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ब्रिक्स का विस्तार किसी विरोधी गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुध्रुवीय (Multi-polar) विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए हुआ है। भारत का यह दृष्टिकोण रहा है कि किसी भी देश के साथ उसके संबंधों को प्रभावित किए बिना बहुपक्षीय मंचों पर स्वतंत्र रूप से सहयोग किया जा सकता है। इस संतुलन ने दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किए बिना वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर, इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते कद और उसकी स्वीकार्यता को और मजबूत किया है। पश्चिमी मीडिया की यह टिप्पणी कि “भारत ने अलग नजरिए वाले देशों में सहमति बनाई और इसे एंटी-अमेरिकी गुट नहीं बनने दिया,” इस बात का प्रमाण है कि आज की तारीख में भारत वैश्विक शांति, स्थिरता और संतुलन का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुका है।

