मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव और वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया और बड़ा दावा किया है। अपनी आयरलैंड यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने भविष्यवाणी की है कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष बहुत जल्द समाप्त हो जाएगा। उनके अनुसार, नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के तुरंत बाद इस सैन्य टकराव का पूरी तरह से अंत हो जाएगा।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। पिछले एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा अवसर है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध के समापन और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को लेकर खुलकर बात की है।
इससे पहले 10 सितंबर को डलास में मीडिया से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि तेहरान प्रशासन यह चाहता है कि वाशिंगटन की सत्ता में एक नरम रुख वाला नेता आए, जिससे उन पर से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव कम हो सके और वे अपने परमाणु कार्यक्रम को बेरोकटोक आगे बढ़ा सकें।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। शुक्रवार को भले ही कीमतों में मामूली नरमी आई हो, लेकिन कई महीनों के अंतराल के बाद क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 104.61 डॉलर और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई 2.4 प्रतिशत गिरकर 100.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
गुरुवार के कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर को छू चुका था, जिसके कारण साप्ताहिक आधार पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। जानकारों का मानना है कि इस अस्थिरता का मुख्य कारण मध्य क्षेत्र में बना हुआ भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता है।
कच्चे तेल के दामों में आई इस ताजा नरमी के पीछे ओमान में शुरू हो रही कूटनीतिक हलचल को मुख्य वजह माना जा रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देशों के साथ बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार हो गया है।
ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी और खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस उच्चस्तरीय बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते एक सुरक्षित ईरान-ओमान शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर होने की मजबूत संभावनाएं जताई जा रही हैं, जिससे वैश्विक व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
दूसरी ओर, इन तमाम वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान के रुख में नरमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने अमेरिका और इजराइल के सामने किसी भी प्रकार से घुटने टेकने या झुकने से दो टूक शब्दों में इनकार कर दिया है। नई दिल्ली में धार्मिक नेताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने हर आक्रामकता का डटकर मुकाबला किया है और वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
पेज़ेशकियान ने पश्चिमी देशों के रवैये को ‘धमकी भरा अहंकार’ करार देते हुए जोर दिया कि मध्य क्षेत्र की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय देशों द्वारा ही सुनिश्चित की जा सकती है, इसमें किसी भी बाहरी ताकत का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आए इस तीखे बयान ने वैश्विक कूटनीति के समीकरणों को और अधिक रोचक बना दिया है।

