इजराइल के नेगेव रेगिस्तान (Negev Desert) के रामोन क्रेटर इलाके में गधों ने एक अद्भुत पारिस्थितिक चमत्कार को अंजाम दिया है। कभी दूर-दूर तक फैली बंजर रेत और वीरानी के लिए जाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब इन मूक जीवों की बदौलत धीरे-धीरे जीवन और हरियाली लौटने लगी है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए भी यह हैरान करने वाला घटनाक्रम है।
इस अनोखे प्रयोग की पृष्ठभूमि 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में शुरू हुई थी, जब बड़े पैमाने पर अनियंत्रित शिकार के कारण इस इलाके से जंगली गधे पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। इसके बाद इजरायली अधिकारियों ने पर्यावरण संतुलन को बहाल करने के लिए एक महत्वाकांक्षी संरक्षण योजना पर काम करना शुरू किया, जिसने आगे चलकर इस बंजर इलाके की किस्मत बदल दी।

रणनीति के तहत, 1968 में ईरान से कुछ दुर्लभ फारसी ओनागर (Persian Onager) प्राप्त किए गए और बाद में 1970 के दशक में इथियोपिया से अफ्रीकी जंगली गधों का एक छोटा समूह मंगाया गया। इजरायली वैज्ञानिकों ने इन दोनों प्रजातियों का संकरण (Cross-breed) तैयार किया, जिससे एक बेहद मजबूत और कठिन रेगिस्तानी माहौल को झेलने में सक्षम ‘सुपर-सर्वाइवर’ हाइब्रिड नस्ल पैदा हुई।
वर्ष 1982 में इसी प्रयोग के तहत कुल 28 जंगली गधों को नेगेव रेगिस्तान के बेहद कठोर और शुष्क माने जाने वाले ‘रैमन क्रेटर’ इलाके में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया। इन गधों ने समय के साथ 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तपते तापमान और विकट जलवायु परिस्थितियों में खुद को पूरी तरह ढाल लिया। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 500 से 600 के बीच पहुंच चुकी है।
अपनी उत्तरजीविता (Survival) की जंग लड़ते हुए इन गधों ने रेगिस्तान में पानी के प्राकृतिक स्रोत तलाशने का अनूठा तरीका निकाला। अपनी प्यास बुझाने और पानी की तलाश में ये अपने मजबूत खुरों से सूखी रेत को खोदकर करीब 6.5 फीट (लगभग 2 मीटर) तक गहरे छोटे कुएं या गड्ढे बना देते हैं।
इन गधों द्वारा बनाए गए इन जलस्रोतों का लाभ केवल उन्हें ही नहीं मिलता, बल्कि भीषण गर्मी और सूखे के दौरान रेगिस्तान के अन्य वन्यजीवों जैसे लोमड़ियों, गजेल (हिरणों) और चमगादड़ों के लिए भी जीवनदान साबित होता है। इसके अलावा, ये गधे रेगिस्तान में उगने वाले बबूल के पेड़ों की फलियां खाते हैं और मलत्याग के जरिए प्राकृतिक खाद के साथ बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं।
रेत में घूमते समय इनके मजबूत कदमों से बनने वाले छोटे-छोटे निशान ‘माइक्रो-रिजर्वयर’ (छोटे जलाशयों) का काम करते हैं, जो हल्की बारिश या अचानक आने वाली बाढ़ के पानी को रोककर मिट्टी की नमी बरकरार रखते हैं। इस प्रकार, एक समय का मृतप्राय और वीरान रेगिस्तान आज इन गधों की वजह से एक जीवंत और समृद्ध इकोसिस्टम में तब्दील हो चुका है।

