रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में आज, 8 मई को ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत भव्य सामूहिक विवाह समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासनिक अमले ने इस वृहद आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह को एक गरिमामय उत्सव में बदलना और समाज में एकता का संदेश देना है।
इस प्रदेशव्यापी आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘सामाजिक समरसता’ है। आज होने वाले समारोहों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के 2300 से अधिक जोड़े एक ही मंडप के नीचे अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार परिणय सूत्र में बंधेंगे। इसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध धर्म के साथ-साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़ों की भागीदारी छत्तीसगढ़ की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक छवि को प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री साय ने इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समानता और सम्मान का उत्सव बताया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण बेटियों की शादी परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय होती थी। लेकिन उनकी सरकार ने इस चिंता को ‘विश्वास’ में बदल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशील शासन की पहुंच सुनिश्चित करने का एक माध्यम है, जिससे हर बेटी को ससम्मान विदा किया जा सके। सरकार की यह प्राथमिकता है कि कोई भी परिवार बिटिया की शादी के खर्च के बोझ तले न दबे।
योजना के वित्तीय लाभों पर नजर डालें तो प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को शासन की ओर से 35 हजार रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि नवदंपति को उनके नए वैवाहिक जीवन की नींव रखने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, विवाह के लिए आवश्यक पूजन सामग्री, उपहार और अन्य व्यवस्थाएं भी विभाग द्वारा निशुल्क सुनिश्चित की जाती हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में सभी आयोजन स्थलों पर भोजन, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह अभियान लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 10 फरवरी 2026 को राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 6,412 जोड़ों का एक साथ विवाह संपन्न हुआ था। इस विशाल आयोजन को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी स्थान मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं उपस्थित होकर 1,316 जोड़ों को आशीर्वाद दिया था, जबकि बाकी जिलों के जोड़े तकनीक के माध्यम से वर्चुअली जुड़े थे।
आज के इस आयोजन को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम जमीनी स्तर पर जुटी हुई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सहयोग से प्रत्येक जिले में उत्सव का माहौल है। यह सामूहिक विवाह न केवल फिजूलखर्ची को रोकने का एक सशक्त संदेश दे रहा है, बल्कि समाज में “बेटी के मान और सम्मान” को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है।

