छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज प्रदेश कांग्रेस की भारी राजनीतिक सक्रियता देखने को मिली। प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में राजीव भवन में बैठकों का एक लंबा दौर चला, जिसमें संगठन की मजबूती और आगामी चुनावों की रणनीति पर गहन मंथन किया गया। इन बैठकों में पायलट ने स्पष्ट किया कि पार्टी अब पूरी तरह से ‘मिशन मोड’ में है और भाजपा सरकार की विफलताओं को जनता के बीच ले जाने के लिए कमर कस चुकी है।
सचिन पायलट ने एक के बाद एक तीन महत्वपूर्ण बैठकें लीं, जिनमें प्रदेश के तमाम दिग्गज नेता शामिल हुए। पहली बैठक में कांग्रेस विधायकों के साथ विधायी रणनीति पर चर्चा हुई, जबकि दूसरी और तीसरी बैठक में क्रमशः जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए। पायलट ने संगठन के निचले स्तर तक संवाद स्थापित करने पर जोर दिया ताकि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय हो सकें।

बैठक के दौरान सचिन पायलट ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो विशेष सत्र बुलाया था, वह केवल अपने ‘पाखंड और झूठ’ को छिपाने का एक जरिया था। पायलट ने दावा किया कि भाजपा सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और अगले ढाई साल बाद जनता उन्हें विदा कर देगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे प्रदेश के हर घर तक जाकर भाजपा की नाकामियों की पोल खोलें।
संगठनात्मक मजबूती के लिए कांग्रेस अब बूथ और ग्राम स्तर पर अपनी कमेटियों के गठन को प्राथमिकता दे रही है। बैठक में पीसीसी चीफ दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी संगठन विस्तार पर अपने सुझाव साझा किए। ब्लॉक अध्यक्षों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय मुद्दों को पहचानें और जनता के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करें।
इस राजनीतिक हलचल में सबसे बड़ा मुद्दा ‘महिला आरक्षण’ बनकर उभरा। सचिन पायलट ने भाजपा पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही पारित हो चुका है, लेकिन केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें इसे लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही हैं। उन्होंने इसे भाजपा का “भ्रमजाल” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस अब इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी।
आने वाले दिनों में कांग्रेस वार्ड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़े जन-जागरण कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के “दुष्प्रचार” को बेनकाब करना और महिलाओं के बीच अपनी पैठ बनाना है। पायलट के सख्त तेवरों ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी अब सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाएगी।
कुल मिलाकर, रायपुर में हुई इन मैराथन बैठकों ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूंकने का काम किया है। संगठन विस्तार, बूथ मैनेजमेंट और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी बिसात बिछा दी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा इस घेराबंदी का जवाब किस तरह से देती है।

