रायपुर, 2 मई 2026: मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई दुखद क्रूज दुर्घटना के मद्देनजर छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटन केंद्रों में संचालित वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पर्यटकों की जान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सुरक्षा मानकों के पालन में कोई भी कोताही अक्षम्य होगी।
मुख्यमंत्री ने धमतरी के गंगरेल और कोरबा के सतरेंगा जैसे प्रमुख जल पर्यटन केंद्रों सहित सभी जिलों के कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जिन भी स्थानों पर नौका विहार या अन्य वॉटर स्पोर्ट्स संचालित हो रहे हैं, वहां तत्काल ‘सुरक्षा ऑडिट’ (Safety Audit) कराया जाए। इस ऑडिट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या मौजूदा व्यवस्थाएं निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप हैं या नहीं।
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए मुख्यमंत्री ने उपकरणों के नियमित तकनीकी परीक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जल क्रीड़ा में उपयोग होने वाली नावों, क्रूज और अन्य मशीनी उपकरणों की समय-समय पर फिटनेस जांच होनी चाहिए। खराब या पुराने पड़ चुके उपकरणों का उपयोग तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी खराबी के कारण होने वाले हादसों को टाला जा सके।
केवल मशीनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मानवीय दक्षता को भी मुख्यमंत्री ने अनिवार्य बताया है। उन्होंने निर्देशित किया कि वॉटर स्पोर्ट्स स्थलों पर केवल प्रशिक्षित और दक्ष कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। लाइफ गार्ड्स और ऑपरेटरों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति में किसी भी गतिविधि के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आपातकालीन प्रबंधन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि हर पर्यटन स्थल पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट, रेस्क्यू बोट और प्राथमिक चिकित्सा किट मौजूद हों। इसके साथ ही एक प्रभावी रेस्क्यू सिस्टम हमेशा सक्रिय मोड में रहना चाहिए, ताकि किसी भी आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में कम से कम समय में बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए श्री साय ने कलेक्टरों को निरंतर निगरानी करने का दायित्व सौंपा है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी भी स्तर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों और संचालकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल चेतावनी नहीं, बल्कि कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि राज्य शासन के लिए नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन पर्यटन तभी फलता-फूलता है जब पर्यटक स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। शासन का लक्ष्य वॉटर स्पोर्ट्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है, जिससे संभावित जोखिमों का शून्य स्तर पर प्रबंधन किया जा सके।
अंत में, मुख्यमंत्री ने इन निर्देशों के क्रियान्वयन की नियमित रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की नसीहत देते हुए कहा कि सतर्कता ही जन-जीवन की रक्षा का एकमात्र विकल्प है। इस पहल के बाद अब प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को नए सिरे से दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गई है।

