रायपुर, 20 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत ‘छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद अब संस्था का नाम बदलकर ‘छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल’ कर दिया गया है। यह बदलाव मंडल को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखकर एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे अब यह राज्य की बड़ी शहरी ढांचागत परियोजनाओं का भी संचालन कर सकेगा।
सदन में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को पूरी तरह ऋणमुक्त कर दिया है। पिछले दो वर्षों में मंडल ने 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के तहत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को भी स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में मंडल प्रदेश के 27 जिलों में सक्रिय है और 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर अपनी तकनीकी क्षमता सिद्ध कर चुका है।
इस संशोधन का एक दूरगामी लक्ष्य रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक विशाल ‘शहरी कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में गृह एवं अधोसंरचना मंडल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से अब रजिस्ट्री के साथ ही भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे आवंटियों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, 650 करोड़ रुपये की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर (DPR) भी तैयार की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधेयक के पारित होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय राज्य में योजनाबद्ध शहरीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार “संकल्प से सिद्धि” के मंत्र के साथ प्रदेश में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। मंडल के दायरे में इस विस्तार से आम नागरिकों को न केवल गुणवत्तापूर्ण और किफायती आवास मिलेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ एक सशक्त और विकसित राज्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा।

