पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की आहट के बीच कोलकाता की राजनीति में सोमवार रात एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और चार बार के पार्षद संतोष पाठक ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। दशकों तक मध्य कोलकाता में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे पाठक का चुनाव से ठीक पहले पाला बदलना कांग्रेस के लिए एक बड़े संगठनात्मक झटके के रूप में देखा जा रहा है। संतोष पाठक को उनकी साफ-सुथरी छवि और जमीनी स्तर की राजनीति के लिए जाना जाता है, और उनके इस कदम ने शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
संतोष पाठक सोमवार रात को राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, महासचिव लॉकेट चटर्जी और दो केंद्रीय नेताओं बिप्लब देब और अमित मालवीय की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए। बिधाननगर स्थित राज्य भाजपा कार्यालय में समिक भट्टाचार्य ने उन्हें पार्टी का उत्तरीय पहनाकर और झंडा सौंपकर औपचारिक रूप से स्वागत किया। भाजपा नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि पाठक का लंबा राजनीतिक अनुभव और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ आगामी चुनावों में संगठन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पार्टी बदलते ही संतोष पाठक ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखे हमले किए और सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 45 में, जहाँ वे स्वयं पार्षद हैं, तृणमूल के नेतृत्व में पांच IPS अधिकारियों ने बूथ के अंदर घुसकर वोट डाले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन तृणमूल के पक्ष में काम कर रहा था और राज्य में लोकतंत्र की स्थिति चिंताजनक है। पाठक ने साफ किया कि वे राज्य में व्याप्त अव्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए भाजपा के साथ आए हैं।
इस दलबदल के बाद चौरंगी विधानसभा सीट पर चुनावी समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में संतोष पाठक इसी सीट से लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार थे, जहाँ वे तीसरे स्थान पर रहे थे। उस समय टीएमसी की नैना बनर्जी को 70,101 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 24,500 और संतोष पाठक को 14,000 से अधिक वोट प्राप्त हुए थे। अब उनके भाजपा के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है, हालांकि पाठक ने इस पर सस्पेंस बनाए रखते हुए कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही लेगा।
राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज पूरा बंगाल तृणमूल कांग्रेस की अराजकता से मुक्ति चाहता है और भाजपा ही राज्य में एकमात्र सशक्त विकल्प बनकर उभरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि संतोष पाठक जैसे वरिष्ठ नेताओं के जुड़ने से पार्टी का जनाधार और मजबूत होगा। संतोष पाठक का कांग्रेस छोड़ना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य के लिए एक नया अध्याय है, बल्कि यह कोलकाता की शहरी सीटों पर पारंपरिक वोटों के ध्रुवीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

