कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ वाले बयान ने देश की राजनीति में एक नया और तीखा भूचाल ला दिया है। पटना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल की गई इस आपत्तिजनक भाषा पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद उनके खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा ली गई है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मल्लिकार्जुन खरगे पटना के बापू सभागार में एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान जब वे केंद्र सरकार और उसकी नीतियों पर तीखा हमला बोल रहे थे, तभी भीड़ में से किसी व्यक्ति ने बीच में टोकते हुए कहा कि ‘मोदी नहीं जाएंगे।’ इसी बात पर कांग्रेस अध्यक्ष अपना आपा खो बैठे और उन्होंने मंच से पलटवार करते हुए कहा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा… बाप भी जाएगा।’ उनके इस बयान के बाद वहां मौजूद लोगों और उस व्यक्ति के बीच झड़प की स्थिति भी बन गई थी।
इस बयान के सार्वजनिक होने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई दिग्गज नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े शब्दों में लिखा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करके राजनीतिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दी हैं।
बीजेपी का आरोप है कि लगातार चुनावों में मिल रही हार और अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने से हताश हो चुकी कांग्रेस पार्टी अब स्तरहीन राजनीति और गाली-गलौज पर उतर आई है। इस बयान के विरोध में देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा उग्र प्रदर्शन किए गए और मल्लिकार्जुन खरगे के पुतले भी फूंके गए। पार्टी ने मांग की है कि कांग्रेस अध्यक्ष को इस अमर्यादित और असंसदीय टिप्पणी के लिए देश की जनता और प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
बवाल के तूल पकड़ने के बाद बिहार की राजधानी पटना में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति के एक सदस्य ने स्थानीय कोतवाली थाने में मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति और उनके परिवार के खिलाफ इस तरह की आपत्तिजनक और सार्वजनिक भाषा का प्रयोग करना कानूनन अपराध है तथा इससे समाज में द्वेष फैलने की आशंका है। पुलिस इस मामले में कानूनी पहलुओं और तथ्यों की जांच कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के बचाव में पूरी ताकत से उतर आई है। भूपेश बघेल और पवन खेड़ा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने सफाई देते हुए कहा है कि खरगे के इस बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इसमें किसी भी तरह की अमर्यादित या गाली जैसी बात नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि यह केवल एक राजनीतिक भाषण के दौरान आवेश में बोली गई सामान्य बोलचाल की भाषा थी, जिसे बीजेपी जानबूझकर एक बड़ा मुद्दा बनाकर जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाने का प्रयास कर रही है।
यह विवाद एक बार फिर से इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय मुख्यधारा की राजनीति में जुबानी जंग और व्यक्तिगत हमले किस हद तक बढ़ते जा रहे हैं। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे देश के सर्वोच्च पद और एक व्यक्ति के सम्मान पर सीधा हमला मानकर कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति और भाषण शैली का हिस्सा बताकर पीछे हटने को तैयार नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक गरमाने के पूरे आसार हैं।

