जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की एर्नाकुलम बेंच ने सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए एयरलाइंस और टैक्स रिफंड नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। यह पूरा मामला अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच यानी कोविड-19 महामारी के दौर का है, जब वैश्विक स्तर पर लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें अचानक रद्द करनी पड़ी थीं। उस संकट के समय में एयरलाइंस कंपनियों ने कई प्रभावित यात्रियों के टिकट रद्द किए और नियमों के तहत उनके किराए के साथ-साथ वसूला गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी वापस लौटा दिया था।
महामारी के उस दौर में रिफंड देने के बाद जब एयरलाइंस ने अपने खातों का मिलान किया और आउटपुट टैक्स लायबिलिटी के सामने क्रेडिट नोट्स का समायोजन करना चाहा, तो प्रक्रियागत जटिलताएं सामने आईं। इसी तकनीकी उलझन के चलते जीएसटी के संयुक्त आयुक्त ने सिंगापुर एयरलाइंस के लगभग 45.92 लाख रुपये के कुल आठ रिफंड दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि नियमों का सही पालन नहीं हुआ है। टैक्स अधिकारियों के इस रवैये से नाराज होकर एयरलाइन ने इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर की थी।
मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए GSTAT ने अपने फैसले में साफ किया कि यदि कोई एयरलाइंस कंपनी फ्लाइट रद्द होने पर यात्रियों को बेस फेयर के साथ-साथ उन पर लगाया गया टैक्स भी पूरी तरह लौटा देती है, तो वह सरकार से उस टैक्स के रिफंड की हकदार बन जाती है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि एयरलाइन ने अदालत के सामने पर्याप्त और पुख्ता दस्तावेज पेश करके यह साबित कर दिया है कि रिफंड का पैसा पूरी तरह से सीधे संबंधित यात्रियों तक पहुंच चुका है।
इस ऐतिहासिक फैसले में कर कानून के ‘अनजस्ट एनरिचमेंट’ यानी अन्यायपूर्ण संवर्धन के सिद्धांत पर भी गंभीरता से विचार किया गया। ट्रिब्यूनल ने यह माना कि चूंकि एयरलाइन ने अपनी तरफ से यात्रियों को टैक्स का पैसा वापस कर दिया था और वह राशि उपभोक्ताओं के पास जा चुकी थी, ऐसे में सरकार द्वारा उस कर की राशि को अपने पास रोककर रखना बिल्कुल उचित नहीं है। एयरलाइन ने किसी भी स्थिति में टैक्स का वित्तीय बोझ अंतिम उपभोक्ता यानी यात्री पर नहीं छोड़ा था, इसलिए कंपनी इस रिफंड को पाने की पूरी हकदार है।
कर विभाग के पुराने और सख्त रुख को खारिज करते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण ने राजस्व अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने टैक्स अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे सिंगापुर एयरलाइंस के रोके गए 45.92 लाख रुपये के रिफंड दावे को महज दो सप्ताह के भीतर प्रोसेस करें और इस राशि का भुगतान तय कानूनी ब्याज के साथ एयरलाइन को तुरंत करें।
यद्यपि यह कानूनी लड़ाई मुख्य रूप से एयरलाइंस और टैक्स विभाग के बीच की थी, लेकिन इसका संदेश विमान यात्रियों के लिए भी बहुत स्पष्ट और राहत देने वाला है। इससे एक बार फिर यह बात पुख्ता हो जाती है कि यदि किसी तकनीकी या अन्य कारण से एयरलाइन की तरफ से उड़ान रद्द होती है, तो यात्रियों को उनके टिकट के किराए के साथ-साथ जीएसटी का पूरा पैसा पाने का पूर्ण कानूनी अधिकार है। साथ ही, एयरलाइंस कंपनियों के लिए भी यह सीख मिलती है कि भविष्य में ऐसे रिफंड और टैक्स समायोजन के दावों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ग्राहकों को किए गए भुगतानों का पारदर्शी और पुख्ता ऑडिट ट्रेल रखना चाहिए।

