बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम के गहरे दबाव में बदलने और एक शक्तिशाली चक्रवाती तूफान का रूप लेने की आशंका ने देश के कई राज्यों में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, यह चक्रवाती तूफान तेजी से आगे बढ़ते हुए उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से तटीय इलाकों में भारी तबाही की आशंका जताई गई है, जिसके चलते प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है।
इस चक्रवात के दौरान हवा की रफ्तार बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, तूफान के तटीय क्षेत्रों से टकराने के समय हवा की गति 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जो बढ़कर 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक के तेज झोंकों में बदल सकती है। इस भारी आंधी के कारण तटीय क्षेत्रों में कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।
तूफान का असर केवल तटीय राज्यों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा काफी बड़ा होने के कारण देश के भीतर स्थित राज्यों तक इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, और सुदूर उत्तर भारत के बिहार तथा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इस मौसमी हलचल का असर साफ तौर पर महसूस किया जाएगा।
बिहार में 28 से 30 अक्टूबर के बीच मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने के संकेत हैं। चक्रवात के नमी वाले बादलों के कारण राज्य के कई जिलों में आसमान में घने बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में भी खासी गिरावट आ सकती है।
इसी तरह, उत्तर प्रदेश के मौसम में भी 28 अक्टूबर के बाद बदलाव की उम्मीद है। विशेष तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में इस चक्रवाती सिस्टम के परोक्ष प्रभाव से बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है, जिससे किसानों की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।
खराब मौसम और समुद्र की विकराल स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों और तटीय इलाकों के रहवासियों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है। मछुआरों को आगामी 29 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी और गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। साथ ही, संभावित प्रभावित राज्यों के प्रशासनिक तंत्र को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।

