हाल ही में वैश्विक वित्तीय बाजारों से एक बड़ी खबर सामने आई है कि सोने की कीमतों में आई नरमी या गिरावट का फायदा उठाते हुए चीन के केंद्रीय बैंक (पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने करीब 21 टन सोने का भारी-भरकम स्टॉक खरीदा है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कुल कीमत लगभग 27 हजार करोड़ रुपये (लगभग 27,112 करोड़ रुपये) बैठती है।
यह सितंबर 2023 के बाद यानी पिछले तीन वर्षों में चीन द्वारा किसी एक महीने में की गई सोने की सबसे बड़ी खरीद है। इस ताजा खरीदारी के साथ ही चीन ने अपने स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) को लगातार बढ़ाने का नया रिकॉर्ड कायम कर लिया है और वह पिछले 23 महीनों से लगातार अपने खजाने में सोना जोड़ रहा है। चीन की इस आक्रामक और लगातार लिवाली ने वैश्विक बाजार में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है।
चीन की इस बड़ी रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य अमेरिकी डॉलर और विदेशी बॉन्ड पर अपनी निर्भरता को कम करना है। दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चीन सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मान रहा है। वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी घटाकर उसकी जगह सोने का अनुपात तेजी से बढ़ा रहा है ताकि किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट के वक्त उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब-जब ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में थोड़ा करेक्शन या गिरावट आती है, चीन के केंद्रीय बैंक के लिए यह खरीदारी करने का सबसे सही मौका बन जाता है। इस रणनीति के तहत चीन कम दामों पर अधिक से अधिक फिजिकल गोल्ड अपने कब्जे में कर रहा है। सितंबर महीने की यह खरीदारी इसी सोची-समझी नीति का एक अहम और बड़ा हिस्सा मानी जा रही है।
इस भारी-भरकम खरीदारी का सीधा असर अब वैश्विक सोने के बाजार और इसकी कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है। जब दुनिया के इतने बड़े और ताकतवर देश के केंद्रीय बैंक इस तादाद में सोना खरीदकर अपने पास सुरक्षित रख लेते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की वास्तविक भौतिक मांग (Physical Demand) काफी बढ़ जाती है।
केंद्रीय बैंकों की इस लगातार लिवाली से सोने की कीमतों को एक मजबूत सपोर्ट मिलता है, जिससे बाजार में इसके बहुत ज्यादा गिरने की गुंजाइश कम हो जाती है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म या अल्पकालिक समय में सोने के दाम अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित होते रहते हैं, लेकिन लंबी अवधि के लिहाज से यह रुझान सोने की कीमतों को और अधिक मजबूती दे सकता है।
यदि आप भी सोने में निवेश करने या गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो वैश्विक केंद्रीय बैंकों की यह लगातार खरीदारी इस बात का साफ संकेत है कि दुनियाभर के बड़े निवेशक और देश सोने को सबसे सुरक्षित आसेट मान रहे हैं। आने वाले समय में बाजार के रुख को देखते हुए जानकारों का यही सुझाव है कि निवेशकों को अपनी रणनीति वैश्विक रुझानों और केंद्रीय बैंकों के कदमों को ध्यान में रखकर ही तय करनी चाहिए।

