छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री, अरुण साव एवं विजय शर्मा, असम के लिए रवाना हुए हैं। यह यात्रा असम में भारतीय जनता पार्टी की लगातार तीसरी बार मिली ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए है। रवानगी से पूर्व मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, जो भाजपा की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
गुवाहाटी रवाना होने से पहले उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि असम सरकार की ओर से मिले औपचारिक निमंत्रण के बाद छत्तीसगढ़ का शीर्ष नेतृत्व इस भव्य समारोह का हिस्सा बनने जा रहा है। साव के अनुसार, असम की जनता ने विकास और सुशासन पर भरोसा जताते हुए भाजपा को पुनः सेवा का अवसर दिया है, जो पूरे देश के कार्यकर्ताओं के लिए उत्साह का विषय है।
इस दौरान अरुण साव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में पेट्रोल, डीजल और उर्वरक पदार्थों को लेकर जनता से किए गए सहयोग के आह्वान का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि देश के सामने जब भी कठिन परिस्थितियां आती हैं, तो प्रधानमंत्री जनता से आगे आने की अपील करते हैं। साव ने जोर देकर कहा कि कोई भी राष्ट्र केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के सक्रिय सहयोग और एकजुटता से ही आत्मनिर्भर और सक्षम बनता है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए साव ने राहुल गांधी के बयानों का तीखा पलटवार किया। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कभी जनता से सहयोग की अपेक्षा नहीं की थी? उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पूरे देश ने मोदी जी के एक आह्वान पर एकजुट होकर महामारी को परास्त किया, ठीक उसी तरह आर्थिक और राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना भी जन-सहयोग के माध्यम से ही संभव है।
समाजवादी पार्टी के एक सांसद द्वारा प्रधानमंत्री के विरुद्ध इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भी अरुण साव ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपशब्दों का प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि राजनीति में सुचिता और मर्यादा का पालन किया जाना अनिवार्य है।
अंत में, उपमुख्यमंत्री ने भाजपा की आगामी संगठनात्मक बैठकों के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी निरंतर अपने ढांचे को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीति तैयार करने में जुटी है। आने वाले समय में संगठन को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की जाएगी, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सके।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों का यह असम दौरा न केवल भाजपा के अंतर-राज्यीय समन्वय को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि प्रदेश का नेतृत्व राष्ट्रीय मुद्दों और प्रधानमंत्री के विजन के साथ मजबूती से खड़ा है। रायपुर से गुवाहाटी तक की यह हलचल छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

