रायपुर, 07 मई 2026: छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” पोर्टल एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रही है। इसी विजन का सुखद परिणाम है कि आज आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल जैसी महत्वपूर्ण 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दी गई हैं।
डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ सेवाओं का सरलीकरण और उनकी समयबद्ध डिलीवरी है, जिसे “सेवा सेतु” पूरी सक्षमता के साथ साकार कर रहा है। एक समय था जब नागरिकों को बुनियादी प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की लंबी दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का हस्तक्षेप भी बना रहता था। लेकिन अब “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए नागरिकों को कार्यालयों के चक्करों से मुक्ति दिला दी है।
तकनीकी उन्नयन के मामले में छत्तीसगढ़ ने एक लंबी छलांग लगाई है। राज्य के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं ही उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव कर दी गई हैं। इस पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें 54 नई सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अब अलग-अलग वेबसाइट्स पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम न रहकर धरातल पर एक वास्तविकता बन गया है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की एक ठोस कहानी बयां करते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का संतोषजनक निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार, 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर कर प्रशासन ने अपनी जवाबदेही सिद्ध की है।
आंकड़ों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (CHiPS) कार्यालय के मुताबिक, आय प्रमाण-पत्र के लिए 32 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल जैसी सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है। तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रशासन ने अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया है, जिससे साक्षरता के विभिन्न स्तरों वाले नागरिक भी आसानी से लाभ उठा पा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक सफल डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली लागू होने के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है। इससे न केवल अनावश्यक देरी समाप्त हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी न्यूनतम हो गई है। आवेदन की स्थिति का पारदर्शी होना जनता और प्रशासन के बीच विश्वास को और गहरा कर रहा है।
कुल मिलाकर, “सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल मात्र नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच विश्वास का एक मजबूत सेतु बनकर उभरा है। सुशासन की यह आधुनिक व्यवस्था छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। यदि इसी गति और पारदर्शिता के साथ सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय प्रेरणा बन सकता है।

