अम्बिकापुर और सरगुजा जिले के वनांचल क्षेत्रों के लिए यह खबर एक नई सुबह की तरह है। पिछले कई दशकों से पहाड़ी कोरवा और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पीने के पानी के लिए प्राकृतिक नालों, झरिया और पुराने कुओं पर निर्भर थे, जिससे न केवल उन्हें मीलों पैदल चलना पड़ता था, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ भी बनी रहती थीं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल ने इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ ला दिया है, जिससे अब इन क्षेत्रों में पेयजल का स्थायी समाधान सुनिश्चित होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर शुद्ध पेयजल का अभाव किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्ययोजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य पहाड़ी कोरवा परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में ही स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की बागडोर सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने संभाली है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के मिलते ही उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की शासी परिषद की बैठक बुलाई। इस बैठक में न केवल अधिकारियों, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों जैसे पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल और लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया। सबकी सहमति से जिले के सात प्रमुख विकासखण्डों में 113 नए हैंडपंप और बोरवेल खनन को मंजूरी दी गई।
विशेष बात यह है कि प्रशासन ने केवल कागजी घोड़े नहीं दौड़ाए हैं, बल्कि कार्य शुरू करने से पहले ही प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय सर्वे पूरा कर लिया है। इस सर्वे के आधार पर सबसे अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। लुण्ड्रा विकासखण्ड में सर्वाधिक 34 कार्यों को मंजूरी दी गई है, जबकि लखनपुर में 22 और मैनपाट जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में 20 बोरवेल खोदे जाएंगे। इसके अलावा सीतापुर, अम्बिकापुर, बतौली और उदयपुर में भी जनसंख्या के अनुसार काम बाँटे गए हैं।
कलेक्टर श्री वसंत ने इस कार्य के लिए एक माह की सख्त समय-सीमा (Dead-line) निर्धारित की है। उन्होंने सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को निर्देशित किया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मानसून आने से पहले इन सभी 113 हैंडपंपों का खनन पूरा करने का लक्ष्य है, ताकि ग्रामीणों को वर्षाकाल में गंदा पानी पीने को मजबूर न होना पड़े और उन्हें स्थायी सुविधा मिल सके।
पहाड़ी कोरवा जनजाति, जो विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में आती है, उनके लिए यह कदम जीवन रक्षक साबित होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में बोरिंग करना एक तकनीकी चुनौती होती है, लेकिन डीएमएफ मद से मिली राशि और प्रशासनिक तत्परता से इस बाधा को पार किया जा रहा है। अब ग्रामीणों को पहाड़ों से उतरकर पानी लेने नीचे नहीं आना पड़ेगा, बल्कि उनके घर के करीब ही हैंडपंप स्थापित किए जाएंगे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री की इस संवेदनशीलता का स्वागत किया है। उनका मानना है कि सरकार द्वारा वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं पर दिया जा रहा ध्यान इन क्षेत्रों के समग्र विकास की नींव रखेगा। वर्षों से उपेक्षित पड़े गांवों में अब न केवल पाइप और बोरवेल पहुँच रहे हैं, बल्कि सरकार के प्रति विश्वास भी बढ़ रहा है।
अंततः, 113 हैंडपंपों का यह नेटवर्क सरगुजा के जल-संकट को दूर करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। जब अगले एक महीने में ये काम पूरे होंगे, तो सैकड़ों गांवों के हजारों निवासियों की दैनिक दिनचर्या बदल जाएगी। पानी के लिए होने वाला संघर्ष खत्म होगा, जिससे ग्रामीण अब अपना समय कृषि और अन्य आजीविका के कार्यों में लगा सकेंगे।

