छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हवाला कारोबार और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। न्यू राजेन्द्र नगर थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई शहर के व्यस्ततम व्यावसायिक केंद्रों में से एक, अशोका मिलेनियम प्लाजा में स्थित ‘हंस ट्रेवल्स’ के कार्यालय में की गई, जहां एक संदिग्ध पार्सल ने पुलिस का ध्यान खींचा।
पुलिस को 6 मई को एक विश्वसनीय सूत्र से जानकारी मिली थी कि कोलकाता से दिल्ली भेजे जा रहे कुछ पार्सल में संदिग्ध वस्तुएं छिपाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) संदीप पटेल ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और संबंधित ठिकाने पर छापेमारी के निर्देश दिए। पुलिस की इस मुस्तैदी ने आरोपियों को संभलने का मौका भी नहीं दिया।
जब पुलिस की टीम हंस ट्रेवल्स के दफ्तर पहुंची और वहां रखे पार्सल की बारीकी से तलाशी ली, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। तलाशी के दौरान तीन सफेद बोरों में भारी मात्रा में भारतीय मुद्रा के नोट भरे हुए मिले। यह नकदी छोटे नोटों के रूप में थी, जिसे बेहद सावधानी से पैक कर पार्सल के रूप में भेजा जा रहा था ताकि किसी को शक न हो।

बरामद की गई राशि का विवरण काफी दिलचस्प है। पुलिस ने गणना के बाद बताया कि इन बोरों में 20 रुपये के 400 बंडल और 10 रुपये के 800 बंडल मौजूद थे। कुल मिलाकर यह राशि 16 लाख रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में छोटे नोटों का एक राज्य से दूसरे राज्य परिवहन करना कई बड़े सवाल खड़े करता है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी रकम का उपयोग विशेष प्रकार के अवैध व्यापार या कमीशन के कामों में किया जाता है।
इस मामले में पुलिस ने फिलहाल बीएनएसएस (BNSS) की धारा 106 के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरामद की गई पूरी नकदी को आधिकारिक तौर पर जब्त कर लिया गया है। चूंकि मामला बड़ी नकदी से जुड़ा है, इसलिए रायपुर पुलिस ने नियमानुसार इसकी विस्तृत जानकारी आयकर विभाग (Income Tax Department) को भी साझा कर दी है, ताकि रुपयों के स्रोत की वित्तीय जांच की जा सके।
वर्तमान में पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर इस मोटी रकम का असली मालिक कौन है और इसे कोलकाता से दिल्ली क्यों भेजा जा रहा था। पुलिस अधिकारी ट्रेवल्स एजेंसी के कर्मचारियों और पार्सल बुक करने वाले व्यक्तियों के रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। शक की सुई हवाला कारोबारियों की ओर भी घूम रही है, जो अक्सर पुलिस की नजरों से बचने के लिए बस और ट्रेवल्स सेवाओं का सहारा लेते हैं।
रायपुर पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर ली जाएगी। इस जब्ती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राजधानी में संदिग्ध गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है। आने वाले दिनों में आयकर विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच से इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

