रायपुर/कबीरधाम: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील रूप कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने न केवल एक सामान्य ग्रामीण के सादे निमंत्रण को स्वीकार किया, बल्कि उसके नए घर के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होकर पूरे गांव को सुखद आश्चर्य में डाल दिया। शासन और जनता के बीच की दूरियों को पाटता यह दृश्य राज्य में जन-सरोकारों की एक नई परिभाषा लिख रहा है।
घटनाक्रम के अनुसार, ग्राम लोखान निवासी मोहन मरावी के नए पक्के घर का निर्माण हाल ही में पूर्ण हुआ था और आज उसका गृह प्रवेश था। जैसे ही मोहन को ज्ञात हुआ कि मुख्यमंत्री उनके गांव के दौरे पर आए हैं, वे बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे उनके पास पहुंच गए। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने गृह प्रवेश का न्योता दिया, जिसे श्री साय ने अपनी सहजता और विनम्रता का परिचय देते हुए तत्काल स्वीकार कर लिया।
मुख्यमंत्री जब मोहन मरावी के घर पहुंचे, तो वहां का माहौल पूरी तरह से पारिवारिक और भावुक हो गया। मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिक ताम-झाम के घर में प्रवेश किया और विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने परंपरागत रूप से नारियल फोड़ा और दीप प्रज्वलित कर गृह प्रवेश की रस्म संपन्न कराई। मुख्यमंत्री के इस व्यवहार ने वहां मौजूद सभी ग्रामीणों का दिल जीत लिया और परिवार के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
इस दौरान एक बहुत ही मार्मिक संवाद भी सुनने को मिला। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए मोहन से पूछा, “आवास कोन भेजिस?” (यह घर किसने भेजा है?)। इस पर मोहन ने बड़ी ही मासूमियत और विश्वास के साथ जवाब दिया, “मोदी जी ने।” यह छोटा सा संवाद इस बात का प्रमाण था कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं किस प्रकार आम आदमी के जीवन में आशा की किरण बनकर पहुंची हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मोहन मरावी और उनके परिवार के साथ बैठकर काफी देर तक चर्चा की। उन्होंने घर की बनावट और निर्माण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री यह जानकर अत्यंत प्रभावित हुए कि मोहन ने न केवल सरकारी सहायता का लाभ लिया, बल्कि इस घर को बनाने में अपना पसीना भी बहाया है। मोहन ने बताया कि पहले उनका परिवार एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था, लेकिन अब उनके पास अपना पक्का ठिकाना है।
मोहन की आत्मनिर्भरता की कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत होने के बाद उनके पास संसाधन सीमित थे। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी और स्वयं ईंटें बनाना शुरू किया। अपनी मेहनत और सरकार से मिली वित्तीय सहायता के मेल से उन्होंने चार कमरों का एक मजबूत और सुंदर घर खड़ा कर दिया, जो आज उनके गौरव का प्रतीक है।

योजना के क्रियान्वयन पर बात करते हुए मोहन ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि उन्हें आवास की राशि तीन अलग-अलग किस्तों में समय पर प्राप्त हुई। इन किस्तों के सही प्रबंधन और ईमानदारी से किए गए उपयोग के कारण ही घर का निर्माण सुचारू रूप से पूर्ण हो सका। मुख्यमंत्री ने मोहन के इस प्रबंधन कौशल और मेहनत की सराहना करते हुए इसे अन्य ग्रामीणों के लिए एक उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि जब शासन की नीतियां और योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तभी लोकतंत्र सार्थक होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोहन मरावी जैसे मेहनतकश लोग, जो सरकारी मदद को अपनी मेहनत से सींचते हैं, वही वास्तव में राज्य के विकास की असली नींव हैं। मुख्यमंत्री ने इसे आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट मॉडल करार दिया।
अंत में, मुख्यमंत्री ने पूरे मरावी परिवार को नए घर की शुभकामनाएं दीं और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि “मोदी की गारंटी” का अर्थ ही यही है कि हर गरीब के सिर पर अपनी पक्की छत हो। मुख्यमंत्री की इस यात्रा ने लोखान गांव के लोगों में एक नया आत्मविश्वास भर दिया है कि उनकी सरकार उनके सुख-दुख में हमेशा उनके साथ खड़ी है।
यह पूरा घटनाक्रम न केवल एक घर के उद्घाटन का था, बल्कि यह शासन की संवेदनशीलता, एक गरीब के सपने के सच होने और प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता की एक गौरवगाथा के रूप में याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस सादगीपूर्ण कदम की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है।

