केरल में हुए 140 सीटों वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत के जादुई आंकड़े 71 को काफी पीछे छोड़ दिया है। शाम तक आए रुझानों और परिणामों के अनुसार, यूडीएफ 100 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है, जिससे राज्य में हर पांच साल में सत्ता बदलने की पुरानी परंपरा फिर से लौट आई है। पिछले दो कार्यकालों से सत्ता पर काबिज वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को इस बार जनता ने पूरी तरह नकार दिया है।
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, शाम साढ़े 5 बजे तक 117 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। इस जीत पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए केरल की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे “न्याय और प्रगति की जीत” बताते हुए कहा कि राज्य की जनता ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जो विश्वास जताया है, उस पर गठबंधन पूरी तरह खरा उतरेगा। वायनाड और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है।
सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह परिणाम किसी बड़े झटके से कम नहीं है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देख रहे वामपंथियों को सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, लेकिन उनके मंत्रिमंडल के कई दिग्गज मंत्रियों को हार का स्वाद चखना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं का झुकाव इस बार बदलाव की ओर स्पष्ट रूप से दिखा।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। भाजपा ने न केवल अपने वोट प्रतिशत में सुधार किया, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी पकड़ भी मजबूत की है। राज्य के त्रिकोणीय संघर्ष वाले क्षेत्रों में भाजपा ने एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के समीकरण बिगाड़ने का काम किया है। हालांकि, मुख्य मुकाबला कांग्रेस और वामपंथियों के बीच ही रहा, जिसमें कांग्रेस ने बाजी मार ली।
केरल की 140 सीटों के लिए कुल 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला आज 43 स्थानों पर बने मतगणना केंद्रों पर हुआ। कड़ी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था के बीच सुबह से ही मतों की गिनती शुरू हो गई थी। यूडीएफ के खेमे में सुबह से ही जश्न का माहौल देखा गया, जहाँ कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ अपनी जीत का स्वागत कर रहे थे। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टियों के मुख्यालयों पर सन्नाटा पसरा रहा, जहाँ अब हार के कारणों पर मंथन की तैयारी शुरू हो गई है।
देर रात तक सभी 140 सीटों के फाइनल परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे, जिसके बाद यूडीएफ विधायक दल की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। केरल के राजनीतिक गलियारों में इस जीत को कांग्रेस के राष्ट्रीय पुनरुद्धार के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले कुछ घंटों में यह साफ हो जाएगा कि नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख क्या होगी, लेकिन फिलहाल केरल की गलियां ‘हाथ’ के नारों से गूंज रही हैं।

