रायपुर/बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने बलरामपुर प्रवास के दौरान विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को जिला मुख्यालय बलरामपुर में 4 करोड़ 48 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे ‘नालंदा परिसर’ का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन भवन के प्रत्येक हिस्से का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और चल रहे कार्यों की वर्तमान प्रगति के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता का भी बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट शब्दों में कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को केवल पूरा करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि इसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता के मानकों के साथ पूर्ण करना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि जिले के विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस परिसर का निर्माण किया जा रहा है, इसलिए गुणवत्ता के मामले में कोई भी समझौता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
श्री साय ने परिसर के भीतर उपयोग की जा रही ईंट, सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता के बारे में अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। उन्होंने प्रस्तावित सुविधाओं के नक्शे और ले-आउट की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण में आधुनिक मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार का प्राथमिक लक्ष्य युवाओं को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे बिना किसी बाधा के अपने सपनों को साकार करने के लिए पढ़ाई कर सकें।
नालंदा परिसर की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इस केंद्र को केवल एक पुस्तकालय के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक शिक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ छात्रों के लिए एक अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी, जहाँ डिजिटल संसाधनों के माध्यम से ज्ञान प्राप्त किया जा सकेगा। इसके साथ ही, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य सेवा आयोग (PSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देश-विदेश की उत्कृष्ट पुस्तकें और प्रामाणिक अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें एक उचित और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है। नालंदा परिसर उसी कमी को पूरा करेगा। यहाँ न केवल समृद्ध अध्ययन सामग्री होगी, बल्कि युवाओं को देश-दुनिया की घटनाओं से अवगत रखने के लिए विभिन्न प्रकार की पत्र-पत्रिकाएं और समाचार पत्र भी सुलभ होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परिसर की आंतरिक सज्जा और फर्नीचर भी छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं।
इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने को कहा, ताकि इसे जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जा सके। उन्होंने कहा कि विलंब होने से छात्रों के बहुमूल्य समय का नुकसान होता है, जिसे सरकार बिल्कुल नहीं चाहती। उन्होंने निर्देश दिया कि कार्य की निरंतर निगरानी की जाए और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाए ताकि बलरामपुर के विद्यार्थियों को इस शैक्षणिक केंद्र का लाभ शीघ्र मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में विश्वास व्यक्त किया कि यह नालंदा परिसर आने वाले समय में जिले के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और सफलता का एक सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने इसे राज्य सरकार की उस बड़ी प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों युवाओं के भविष्य निर्माण की आधारशिला है।
निरीक्षण के अंत में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने और परिसर के चारों ओर हरियाली व शुद्ध वातावरण विकसित करने के भी सुझाव दिए। उनके इस दौरे से प्रशासनिक अमले में सक्रियता देखी जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी कुछ महीनों में यह परिसर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा, जो बलरामपुर की नई पहचान बनेगा।

