रायपुर, 29 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास, उनकी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लेकर कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास की मुख्यधारा को पहुँचाना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक को संबोधित करते हुए बस्तर की भौगोलिक विशालता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बस्तर का क्षेत्रफल केरल जैसे राज्यों से भी बड़ा है, लेकिन दशकों तक यह क्षेत्र विकास की राह जोहता रहा। अब सरकार की सक्रियता से यहाँ योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र प्रदेश के विकास के नए मॉडल के रूप में उभरेंगे।

बैठक का एक प्रमुख आकर्षण “नियद नेल्ला नार 2.0” योजना की घोषणा रही। मुख्यमंत्री ने इस योजना के पहले चरण की सफलता को देखते हुए इसके उन्नत संस्करण को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए। इस पहल के माध्यम से राज्य के सबसे दुर्गम और सुदूर अंचलों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़कें और उचित मूल्य की दुकानों (राशन) जैसी मूलभूत सुविधाओं का जाल बिछाया जाएगा।
जनजातीय संस्कृति और आस्था के केंद्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासनों को सख्त हिदायत दी कि इन पवित्र स्थलों पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की उच्च स्तरीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं ताकि स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए परिषद ने कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस संबंध में आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर जल्द से जल्द केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव प्रेषित किया जाए, ताकि इन समुदायों को संवैधानिक लाभ मिल सके।

शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित और स्थाई शिक्षण व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चे खुले में बैठकर शिक्षा ग्रहण न करें, उनके लिए उचित भवन और बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य हैं। इसके साथ ही प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में सीटों की वृद्धि और शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बैठक में जानकारी दी गई कि “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के अंतर्गत अब तक लगभग 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इसके अलावा, “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है, जबकि पीएम जनमन योजना के तहत 32 हजार आवासों की स्वीकृति एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्य समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से बरसात के मौसम में कटने वाले मार्गों की मरम्मत और रखरखाव के लिए पूर्व तैयारी रखने के निर्देश दिए।
आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों से नक्सलवाद विकास के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा था। अब सुरक्षा बलों और सरकार के समन्वित प्रयासों से इस चुनौती पर नियंत्रण पाया गया है, जिससे विकास कार्य धरातल पर दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अब विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों तक भी पक्की सड़कें और बिजली पहुँच रही है।
बैठक के समापन पर मंत्री श्री नेताम ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की कि वे जनजातीय समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करें। उन्होंने विश्वास दिलाया कि नए छात्रावासों और विकास योजनाओं के माध्यम से सुदूर अंचलों की छिपी हुई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त होंगे।
इस उच्च स्तरीय बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वनमंत्री श्री केदार कश्यप सहित बस्तर और सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, कई विधायक और मुख्य सचिव सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने एक स्वर में जनजातीय विकास के इन ऐतिहासिक निर्णयों का स्वागत किया और उन्हें धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

