रायपुर, 28 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए “ई-श्रम साथी” मोबाइल एप्लीकेशन का विधिवत शुभारंभ किया। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के श्रम विभाग के कार्यों की बारीकी से जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने “ई-श्रम साथी” ऐप को “छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक” के रूप में परिभाषित किया। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को घर बैठे ही रोजगार के अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के इस दौर में श्रमिकों को अपने काम के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि इस ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिक भी इसका लाभ उठा सकें।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020 को छत्तीसगढ़ में पूरी दृढ़ता से लागू किया जाए। इन संहिताओं का लक्ष्य श्रमिकों को न केवल सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है, बल्कि उनकी सामाजिक सुरक्षा को भी कानूनी रूप से सुदृढ़ करना है।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने मैदानी अमले की जवाबदेही तय करते हुए कहा कि योजनाओं की सफलता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति के जीवन में आए बदलाव से मापी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर योजनाओं के क्रियान्वयन का अवलोकन करें। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना ही प्रशासन का असली लक्ष्य होना चाहिए, ताकि पात्र हितग्राही लाभ से वंचित न रहें।
औद्योगिक सुरक्षा पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने तकनीक के उपयोग से औद्योगिक इकाइयों के औचक निरीक्षण की नई प्रणाली विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पारदर्शिता आवश्यक है। तकनीक आधारित निरीक्षण से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन कड़ाई से कराया जा सकेगा, जिससे कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
बैठक के दौरान भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2008 से अब तक छत्तीसगढ़ में 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा वर्तमान में 26 विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में उपकर (सेस) के माध्यम से 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो श्रमिक कल्याण निधि की मजबूती को दर्शाते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में श्रमिकों के बच्चों के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की मुख्यमंत्री ने सराहना की। उन्होंने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में श्रमिक परिवारों के 95 मेधावी छात्र अध्ययनरत हैं। इसके साथ ही नौनिहाल छात्रवृत्ति और निःशुल्क कोचिंग जैसी योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है।
श्रमिकों के सामाजिक उत्थान के लिए संचालित अन्य प्रमुख योजनाओं जैसे मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना और दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये योजनाएं न केवल आर्थिक मदद प्रदान करती हैं, बल्कि महिला श्रमिकों और उनकी बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाती हैं। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर बात करते हुए ई-केवाईसी (e-KYC) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 55 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। शेष श्रमिकों का सत्यापन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए ताकि योजनाओं का पैसा सीधे सही पात्र व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंच सके और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाए।
अंत में, मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना और मोबाइल कैंपों के माध्यम से पहुंच बढ़ाने की सराहना की। इस उच्च स्तरीय बैठक में श्रम मंत्री श्री लखन देवांगन, मुख्य सचिव श्री विकासशील और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के इन कड़े निर्देशों और नई डिजिटल पहल से छत्तीसगढ़ के श्रमिक वर्ग के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को एक नई गति मिलने की उम्मीद है।

