रायपुर, 15 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने और समाज के हर तबके तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इस पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश भर के 14,403 बच्चों का चयन निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए सुनिश्चित किया गया है।
इस वर्ष आरटीई के तहत प्रवेश के लिए राज्य भर से कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभागीय छानबीन और कड़े मानकों पर परीक्षण के बाद 27,203 आवेदनों को पात्र पाया गया। इन पात्र आवेदनों में से कम्प्यूटरीकृत लॉटरी प्रणाली के जरिए 14,403 बच्चों को उनकी पसंद और पात्रता के आधार पर निजी शिक्षण संस्थानों में सीटें आवंटित की गईं। पूरी प्रक्रिया के दौरान शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने सुव्यवस्थित समय-सारिणी के पालन पर संतोष व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी बच्चे का बुनियादी और मौलिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक तंगी की वजह से अच्छी शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में समानता लाना है, ताकि गरीब और अमीर दोनों परिवारों के बच्चे एक ही छत के नीचे बैठकर बेहतर भविष्य की तैयारी कर सकें।
उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के अनुसार, सभी निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। इस योजना का प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है, क्योंकि वर्तमान में प्रदेश के लगभग 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना का सीधा लाभ उठा रहे हैं। सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, राज्य सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि में बड़ा इजाफा किया है। इस मद में अब 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट में की गई इस वृद्धि का उद्देश्य निजी स्कूलों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना के दायरे में लाना है, जिससे प्रवेश की पूरी प्रक्रिया आर्थिक रूप से और अधिक सुदृढ़ हो सके।
सरकार ने इस पूरी प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और ‘पेपरलेस’ बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। आवेदन करने से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और लॉटरी के माध्यम से चयन तक के सभी चरण तकनीक पर आधारित हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभिभावकों को चॉइस सेंटर या स्वयं ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई थी। इस डिजिटल सुशासन ने चयन प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों की आशंका को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

प्रणाली की एक और विशेषता यह है कि आवेदन के दौरान ही सिस्टम अभिभावकों को उनके निवास स्थान से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित स्कूलों और वहां उपलब्ध सीटों की सटीक जानकारी प्रदान करता है। इससे अभिभावकों को स्कूल चुनने में सहजता होती है। नियमानुसार, कक्षा पहली में प्रवेश के लिए 5.5 से 6.5 वर्ष की आयु के बच्चों को पात्र माना गया है, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग बच्चों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
अंत में, विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में ऑनलाइन लॉटरी के बाद भी सीटें रिक्त रह जाएंगी, वहां जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। रिक्त सीटों और अगली प्रक्रिया की पूरी जानकारी आरटीई पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। राज्य सरकार का यह दूरदर्शी कदम न केवल हजारों सपनों को नई उड़ान दे रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक उत्तरदायी और समावेशी शिक्षा तंत्र की नींव भी मजबूत कर रहा है।

