असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शाम 6 बजे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई। इस चुनाव में असम ने अपने मतदान के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, असम में शाम तक मतदान का प्रतिशत 85.64% तक पहुँच गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। सुबह से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मतदान केंद्रों पर उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों ने भारी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से ही लंबी कतारें देखी गईं, जहाँ युवाओं से लेकर बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं में भी जबरदस्त उत्साह नजर आया। असम के कई निर्वाचन क्षेत्रों, जैसे दलगाँव और धुबरी में मतदान का प्रतिशत 90% के करीब दर्ज किया गया। कई बूथों पर तो शाम 6 बजे की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सैकड़ों की संख्या में लोग अपनी बारी का इंतजार करते दिखे, जिन्हें चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार वोट डालने की अनुमति दी गई। महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता बनकर उभरी है।
केरल और पुडुचेरी में भी लोकतंत्र के प्रति जनता का भारी रुझान देखने को मिला। केरल में जहाँ मतदान का प्रतिशत 78% के पार रहा, वहीं पुडुचेरी ने लगभग 90% मतदान कर पूरे देश को चौंका दिया। केरल में इस बार चुनाव आयोग ने पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई बूथों पर AI-आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया था। शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप किसी भी राज्य से किसी बड़ी अप्रिय घटना या चुनावी हिंसा की सूचना नहीं मिली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान के इन भारी आंकड़ों ने सभी दलों के समीकरण बदल दिए हैं। उच्च मतदान को अक्सर मौजूदा सरकार के खिलाफ गुस्से या फिर सरकार के पक्ष में जबरदस्त लहर के रूप में देखा जाता है। जहाँ सत्ताधारी दल अपनी योजनाओं की सफलता के दम पर वापसी की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इस भारी भीड़ को बदलाव की आहट मान रहा है। रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है और हर खेमा अपनी जीत के दावे कर रहा है।
अब सभी की नजरें 4 मई, 2026 पर टिकी हैं, जिस दिन मतगणना होगी और यह स्पष्ट होगा कि जनता ने किन वादों और चेहरों पर अपना भरोसा जताया है। फिलहाल, मतदान के इन ऐतिहासिक आंकड़ों ने यह तो सिद्ध कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र में आम आदमी की आवाज और वोट की ताकत आज भी सबसे ऊपर है। आने वाले कुछ दिन इन राज्यों में राजनीतिक अटकलों और एग्जिट पोल के दौर के नाम रहने वाले हैं।

