छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से समाज सेवा की एक बेहद प्रेरक खबर सामने आई है। वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति लाने वाली संस्था जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS) के प्रयासों को अब क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर के फाउंडेशन का बड़ा सहारा मिला है। हाल ही में ‘सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन’ की एक उच्चस्तरीय टीम ने बिलासपुर के गनियारी और अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे ग्रामीण इलाकों का दौरा किया, जिससे इस क्षेत्र में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं के विस्तार की नई राहें खुल गई हैं।
इस दौरे की खास बात यह रही कि इसमें सचिन तेंदुलकर की पत्नी डॉ. अंजलि तेंदुलकर, उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और परिवार की अन्य सदस्य सानिया तेंदुलकर शामिल थीं। टीम ने न केवल अस्पताल के कामकाज को देखा, बल्कि दुर्गम वनांचल के उन 72 गांवों तक भी पहुंचीं जहां संस्था अपनी सेवाएं दे रही है। तेंदुलकर परिवार ने जमीनी स्तर पर जाकर यह समझने की कोशिश की कि कैसे एक छोटे से प्रयास से आदिवासी और ग्रामीण बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा रहा है।
JSS के सह-संस्थापक डॉ. रमन कटारिया ने बताया कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन पिछले एक साल से उनके ‘फुलवारी’ कार्यक्रम में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से तीन साल से कम उम्र के बच्चों पर केंद्रित है। वर्तमान में इस साझेदारी के माध्यम से लगभग 1000 बच्चों को उचित पोषण, सुरक्षित वातावरण और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। यह पहल उन परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है जो मजदूरी या खेती के लिए घर से दूर जाते हैं और उनके बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं होता।
दौरे के दौरान तेंदुलकर परिवार ने संस्था के समर्पण की सराहना की और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य वनांचल क्षेत्रों में कुपोषण की गहरी जड़ों को काटना और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीणों को किफायती इलाज उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में इस सहयोग से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और पोषण अभियानों में और अधिक विस्तार होने की उम्मीद है।
यह सहयोग न केवल बिलासपुर के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य मॉडल के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जब सचिन तेंदुलकर जैसा वैश्विक नाम ग्रामीण स्वास्थ्य की दिशा में काम करने वाली संस्था के साथ जुड़ता है, तो इससे न केवल संसाधनों की वृद्धि होती है, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी इस तरह के मानवीय कार्यों में हाथ बंटाने की प्रेरणा मिलती है।

