भारतीय चुनाव आयोग देश के शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का तीसरा और अंतिम चरण शुरू करने की योजना बना रहा है। इस विशाल अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक और अद्यतित बनाना है। आयोग ने संकेत दिया है कि दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू हो सकती है, जो मौजूदा विधानसभा चुनावों के समापन के ठीक बाद का समय है।
प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को लेकर दो संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। पहली संभावना के अनुसार, चुनाव समाप्त होते ही 29 अप्रैल को काम शुरू कर दिया जाएगा, जबकि दूसरी संभावना यह है कि सभी पांच राज्यों के चुनावी परिणामों की औपचारिक घोषणा के बाद ही इस बड़े अभियान को हाथ में लिया जाए। अब तक की प्रगति के अनुसार, चुनाव आयोग सफलतापूर्वक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में इस पुनरीक्षण कार्य को पूरा कर चुका है।
आंकड़ों के लिहाज से यह अभियान बेहद व्यापक है। भारत में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 99 करोड़ है, जिनमें से 60 करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण पहले ही किया जा चुका है। अब आयोग का ध्यान शेष 39 करोड़ मतदाताओं पर है, जो 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। असम जैसे राज्यों में ‘विशेष संशोधन’ के माध्यम से चुनावी रजिस्टरों को पहले ही दुरुस्त किया जा चुका है।
वर्तमान में देश के पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों—केरल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी चल रही है। इन राज्यों में मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 मई को मतगणना की जाएगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी व्यस्तता खत्म होते ही शेष राज्यों में मतदाता सूची की छंटनी और सुधार का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू करना चाहता है, जिसके लिए अधिकारियों को तैयारी रखने को कहा गया है।
चुनाव आयोग ने 19 फरवरी को ही दिल्ली सहित 22 राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर तैयारी पूरी करने के निर्देश दे दिए थे। पत्र में उल्लेख किया गया था कि यह अखिल भारतीय पुनरीक्षण अभियान पिछले साल जून में ही शुरू किया जाना था, लेकिन कई अपरिहार्य कारणों से इसकी समयसारणी में बार-बार बदलाव करना पड़ा। अब आयोग अप्रैल के अंत तक इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।
पश्चिम बंगाल से आए हालिया आंकड़े इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाते हैं। बंगाल में SIR अभियान के दौरान मतदाता सूची से लगभग 90.83 लाख नाम हटाए गए हैं। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। यह छंटनी उन नामों की है जो या तो फर्जी थे, या संबंधित मतदाता की मृत्यु हो चुकी थी अथवा वे उस स्थान से पलायन कर चुके थे।
आगामी चरण में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों के मतदाता रजिस्टरों की गहन जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर के राज्यों को भी शामिल किया गया है। आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले समय में होने वाले किसी भी चुनाव के लिए मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन हो, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

