पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों में से बचे हुए सभी लंबित मामलों का निपटारा अगले 24 घंटों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट के अनुसार, अब तक 59.15 लाख मामलों का निस्तारण हो चुका है और शेष पर आज ही फैसला लेना अनिवार्य है, ताकि रात तक पूरक मतदाता सूची जारी की जा सके।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी शीर्ष अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य से केंद्रीय सुरक्षा बल फिलहाल नहीं हटाए जाएंगे। न्यायिक अधिकारियों और चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मियों को डराने-धमाने की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि राज्य सरकार सुरक्षा देने में विफल रहती है, तो कोर्ट सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
वहीं, अपीलों के निपटारे में देरी की शिकायतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति को 7 अप्रैल तक नई गाइडलाइन तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से अधिकरणों के सक्रिय न होने की दलील पर अदालत ने जोर देकर कहा कि निर्वाचन आयोग का प्राथमिक कर्तव्य चुनावी भागीदारी को बढ़ाना और एक निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
अंत में, तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए 7 अप्रैल की समय-सीमा तय की गई है, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करना भी शामिल है। अदालत ने साफ किया है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता बनाए रखने के लिए डिजिटल और भौतिक दोनों तरह के साक्ष्यों की गहन जांच की जाएगी। इस कड़े रुख से साफ है कि न्यायपालिका बंगाल चुनाव की शुचिता को लेकर कोई भी समझौता करने के मूड में नहीं है।

