रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में आयोजित एक भव्य जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के लिए बड़ी सौगात दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के माध्यम से कुल 79,340 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिजनों के बैंक खातों में 27.15 करोड़ रुपए की सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे हस्तांतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों का पसीना प्रदेश के विकास की नींव है और सरकार उनकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने जनधन खातों और डीबीटी प्रणाली की पारदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि अब बिचौलियों का दौर खत्म हो गया है और हितग्राहियों को उनका पूरा हक बिना किसी कटौती के मिल रहा है।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों पर विराम लगाया। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत की मजबूत विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की आपूर्ति पर कोई संकट नहीं आएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि नागरिक ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें, क्योंकि सरकार निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह ही बनी रहेगी और किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।
श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि अब श्रमिकों को मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। साथ ही, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ई-रिक्शा खरीदने हेतु दी जाने वाली सहायता राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में श्रमिकों के बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने घोषणा की कि यदि कोई बच्चा 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान बनाता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ‘अटल शिक्षा योजना’ के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले श्रमिक बच्चों की सीटों की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए चलाई जा रही ‘दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत सालाना 10,000 रुपए की सहायता दी जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करते हुए उन्होंने बताया कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को अब यूनिवर्सल बना दिया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करें, उनका पीएफ लाभ निरंतर जारी रहेगा। साथ ही न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 1,000 रुपए किया गया है और ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर व निशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है।
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में ऐसे आयोजनों के माध्यम से श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे श्रमिकों के खातों में भेजी जा चुकी है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को प्रदेश की प्रगति का आधार बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान कई श्रमिक बंधुओं को विभिन्न योजनाओं के तहत चेक और प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जिससे क्षेत्र के श्रमिक परिवारों में हर्ष का माहौल देखा गया।

