रायपुर/जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के विरुद्ध जारी अभियान को आज एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है। बस्तर के कुख्यात और मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 सशस्त्र साथियों के साथ जगदलपुर में पुलिस और प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दशकों से बस्तर की वादियों में दहशत का पर्याय रहे पापाराव का मुख्यधारा में लौटना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है, जिससे नक्सली संगठन के सूचना तंत्र और मनोबल को गहरा आघात पहुँचा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह घटना नक्सलवाद के अंत की शुरुआत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि माओवादी विचारधारा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की जनता ने हिंसा को पूरी तरह से नकार दिया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जिस प्रकार बड़े कैडर के नक्सली अब हथियार डाल रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ की धरती पर अब केवल विकास और शांति की भाषा ही प्रभावी होगी। उन्होंने इसे राज्य सरकार की ‘विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति की जीत बताया।
मुख्यमंत्री ने इस परिवर्तन का श्रेय राज्य की प्रभावी पुनर्वास नीति और केंद्र सरकार के मजबूत मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ‘नक्सल मुक्त भारत’ का संकल्प अब निर्णायक मोड़ पर है। राज्य सरकार द्वारा अंदरूनी क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही बुनियादी सुविधाओं—जैसे पक्की सड़कें, स्कूल, अस्पताल और बिजली—ने स्थानीय युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास जगाया है। यही कारण है कि अब भटके हुए युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
सुरक्षाबलों की सराहना करते हुए श्री साय ने कहा कि जवानों के साहस और निरंतर दबाव के कारण ही नक्सली नेतृत्व अब ढह रहा है। सरकार की पारदर्शी नीतियों ने यह साबित कर दिया है कि जो भी व्यक्ति हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है, उसे सुरक्षा और बेहतर भविष्य की पूरी गारंटी दी जाएगी। पापाराव का आत्मसमर्पण न केवल एक सैन्य सफलता है, बल्कि यह बस्तर में आ रहे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव का भी प्रतीक है।
अंततः, इस घटनाक्रम ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि बस्तर अब “बंदूक” की छाया से बाहर निकलकर “बदलाव” की राह पर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ देश के सबसे सुरक्षित और समृद्ध राज्यों की श्रेणी में शीर्ष पर होगा। सरकार का लक्ष्य अब अंतिम नक्सली कैडर तक पहुंचकर बस्तर के कोने-कोने में शांति का तिरंगा लहराना है।

