छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में इन दिनों नगर पंचायत की एक कार्रवाई ने विवाद खड़ा कर दिया है। महानदी के तट पर अपनी नावों के जरिए परिवार पालने वाले गरीब नाविकों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। आरोप है कि नगर पंचायत ने करीब 9-10 दिन पहले कुछ चुनिंदा नाविकों की नावों के मोटर जप्त कर लिए, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह ठप हो गई है।
नाविकों के बीच सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि प्रशासन की यह कार्रवाई भेदभावपूर्ण नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि नदी में कई नावें चल रही हैं, लेकिन कार्रवाई केवल 2-3 संचालकों पर ही क्यों की गई? इस पक्षपातपूर्ण व्यवहार ने प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
मामला केवल मोटर जप्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि नाविकों ने नगर पंचायत पर ‘अवैध वसूली’ के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्वच्छता के नाम पर उनसे रोजाना की कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा मांगा जा रहा है। जब सरकार स्वच्छता अभियान के लिए करोड़ों का बजट देती है, तो गरीब मजदूरों की जेब पर इस तरह का बोझ डालना समझ से परे है।
अपनी इन मांगों और परेशानियों को लेकर नाविकों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नगरवासियों के साथ मिलकर मोर्चा खोल दिया है। एकजुट होकर इन लोगों ने नगर पंचायत सीएमओ (CMO) को एक ज्ञापन सौंपा है। उनकी मांग है कि जप्त किए गए मोटर तुरंत वापस किए जाएं और उन्हें सम्मानपूर्वक नाव संचालन की अनुमति दी जाए ताकि वे अपने परिवार का पेट पाल सकें।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना यह होगा कि क्या नगर पंचायत इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस सफाई देता है या फिर गरीब नाविकों को न्याय के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। यह विवाद अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

