छत्तीसगढ़ विधानसभा में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के लिए 4,808 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित
रायपुर, 13 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंक राम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु कुल 4,808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गईं। बजट प्रावधानों में भू-राजस्व और जिला प्रशासन के लिए सर्वाधिक 2,206 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1,306 करोड़ रुपये और प्राकृतिक आपदा राहत हेतु 1,272 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है, जो राज्य के विकास और सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केवल राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग हेतु 3,502 करोड़ रुपये का पृथक बजट प्रावधान है। इस भारी भरकम निवेश का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को तहसील और जिला कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना और उन्हें त्वरित, गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सेवाएं प्रदान करना है।
राज्य में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के गठन के समय प्रदेश में मात्र 16 जिले थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 33 हो गई है। इसी अनुपात में राजस्व अनुविभागों, तहसीलों, राजस्व निरीक्षक मंडलों और पटवारी हल्कों का भी विस्तार किया गया है। इस पुनर्गठन का सीधा लाभ जनता को मिल रहा है, क्योंकि अब प्रशासनिक इकाइयां लोगों के घर के करीब पहुँच गई हैं, जिससे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कार्यों में लगने वाले समय में भारी कमी आई है।
तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में सरकार ने ‘ऑटो डायवर्सन’ और ‘डिजिटल किसान किताब’ जैसी क्रांतिकारी योजनाएं लागू की हैं। श्री वर्मा ने बताया कि अब भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी; आवेदन के मात्र 15 दिनों के भीतर यह प्रक्रिया स्वतः पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही, डिजिटल किसान किताब के माध्यम से किसान अपनी भूमि का स्वामित्व और ऋण संबंधी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें बैंकों से कृषि ऋण लेने में अभूतपूर्व सुगमता हो रही है।
जमीन की खरीदी-बिक्री में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार ने ‘स्वतः नामांतरण’ (Auto Mutation) की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू कर दी है। अब रजिस्ट्री होते ही जमीन का नामांतरण क्रेता के नाम पर अपने आप दर्ज हो जाता है। इस व्यवस्था से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है, बल्कि आम आदमी को पटवारी और तहसीलदारों के दफ्तरों के चक्कर लगाने से भी बड़ी राहत मिली है। यह कदम ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत को धरातल पर उतारने जैसा है।
कृषि क्षेत्र की आधुनिक निगरानी के लिए सरकार ने नई ‘उपहार’ (UPHAR) योजना की घोषणा की है। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से फसल क्षेत्र का सटीक आकलन, उत्पादन अनुमान और प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की पारदर्शी गणना की जा सकेगी। यह तकनीक भविष्य में फसल बीमा और राहत राशि वितरण में आने वाली विसंगतियों को पूरी तरह समाप्त कर देगी।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ के माध्यम से सरकार ने ग्रामीण परिवारों को बड़ा आर्थिक संबल दिया है। इस योजना के तहत भूमिहीन मजदूरों को प्रति वर्ष 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। बजट में इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के 496 करोड़ रुपये से अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की आय बढ़ाने के लिए गंभीर है।
ग्रामीण आबादी को उनके आवास का कानूनी अधिकार देने के लिए ‘स्वामित्व योजना’ पर भी तेजी से काम चल रहा है। मंत्री श्री वर्मा ने सदन को सूचित किया कि राज्य के 10.50 लाख हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1.60 लाख लोगों को उनके घर का मालिकाना हक (अधिकार पत्र) वितरित किया जा चुका है। यह योजना ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि उन्हें अपने मकान पर बैंक ऋण लेने के योग्य भी बनाती है।
प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित राहत सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को वित्तीय रूप से मजबूत किया है। आगामी वर्ष के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में 588 करोड़ रुपये, राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) में 147 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली और सुदृढ़ राहत व्यवस्था के माध्यम से सरकार का लक्ष्य बाढ़, सूखा और अतिवृष्टि जैसी स्थितियों में जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है।
अंत में, राजस्व मंत्री ने विश्वास जताया कि डिजिटल राजस्व प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ एक ‘मॉडल स्टेट’ के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राजस्व विभाग की हर सेवा अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुँचे। इन अनुदान मांगों के पारित होने के साथ ही राज्य में भू-अभिलेखों के पूर्ण डिजिटलीकरण और नागरिक सेवाओं के आधुनिकीकरण का नया मार्ग प्रशस्त हो गया है।

