रायपुर, 12 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण और समाज कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11,762 करोड़ 53 लाख रुपये की अनुदान मांगें पारित की हैं। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग को 10,162 करोड़ रुपये और समाज कल्याण विभाग को 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुरक्षा पहुँचाना है।
इस बजट की सबसे प्रमुख घोषणा ‘रानी दुर्गावती योजना’ है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी के तहत शुरू किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। सरकार ने इस पहल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि बेटी का जन्म परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
योजना के तहत, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों में जन्म लेने वाली बेटी के नाम पर सरकार 1.5 लाख रुपये का ‘एश्योरेंस सर्टिफिकेट’ जारी करेगी। यह राशि सीधे तौर पर बेटी के खाते में जमा नहीं होगी, बल्कि एक निवेश के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। जब बेटी 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेगी, तब यह परिपक्व राशि उसे प्रदान की जाएगी, ताकि वह अपनी उच्च शिक्षा या विवाह जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों को बिना किसी आर्थिक तंगी के पूरा कर सके।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में भारी बढ़ोतरी की है। विभाग को कुल 11,763 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आवंटित की गई है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘महतारी वंदन योजना’ के लिए रखा गया है, लेकिन रानी दुर्गावती योजना को भी प्राथमिकता के साथ लॉन्च किया जा रहा है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की पात्र बालिकाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण और समाज कल्याण की दिशा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11,762 करोड़ 53 लाख रुपये की अनुदान मांगें पारित की हैं। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग को 10,162 करोड़ रुपये और समाज कल्याण विभाग को 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुरक्षा पहुँचाना है।
इस बजट की सबसे प्रमुख घोषणा ‘रानी दुर्गावती योजना’ है, इस वर्ष के बजट में योजना के शुरुआती क्रियान्वयन के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो बेटियों की शिक्षा और उनके स्वावलंबन में मददगार साबित होगा।
महिला सशक्तिकरण के अन्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए मंत्री ने महतारी वंदन योजना की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (120 करोड़) और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन व पूरक पोषण आहार के लिए लगभग 1,450 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।
छात्राओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सरकार ने ‘शुचिता योजना’ और ‘किशोरी बालिका योजना’ के लिए विशेष बजट रखा है। वहीं, समाज कल्याण विभाग के माध्यम से बुजुर्गों के लिए ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर और दिव्यांगजनों के पुनर्वास कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1,402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 21.76 लाख हितग्राहियों को सीधा लाभ मिलेगा।
अंततः, यह बजट राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर पोषण और बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने वाला एक व्यापक रोडमैप पेश करता है। सखी निवास, वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से राज्य में एक सुरक्षित सामाजिक ढांचे के निर्माण की उम्मीद जगी है।

