छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रसिद्ध कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल पर धोखाधड़ी और अपमान का गंभीर आरोप लगाया। महाराज का दावा है कि जनवरी 2026 में मंत्री के गृह ग्राम लखनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के बदले उन्हें 15 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने न्याय न मिलने की स्थिति में विधानसभा के बाहर आत्मदाह करने की कड़ी चेतावनी दी है।
कथावाचक के अनुसार, वे जब अपने पारिश्रमिक के लिए मंत्री के पास गए, तो उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे एक संत का घोर अपमान और सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ बताया है। डॉ. रामानुरागी फिलहाल विधानसभा के बाहर धरने पर डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
दूसरी ओर, मंत्री राजेश अग्रवाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है। मंत्री का तर्क है कि कथावाचक ने संस्कृति विभाग में आयोजन के लिए आवेदन दिया था, जिसे उन्होंने केवल सामान्य प्रक्रिया के तहत मार्क किया था। विभाग द्वारा फंड की अनुपलब्धता के कारण आवेदन रद्द कर दिया गया था। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई कथा आयोजित नहीं करवाई थी और न ही वे उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
इस मामले को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कथावाचक का वीडियो साझा करते हुए इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बाहरी राज्यों के कथावाचकों का भव्य स्वागत करती है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय संतों को उनके पैसे के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इस विवाद ने अब प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक रूप ले लिया है।

