सुप्रीम कोर्ट ने आगामी दिवाली के त्योहारी सीजन को लेकर पटाखों के इस्तेमाल पर एक संतुलित और महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध (ब्लैंकेट बैन) नहीं लगाया जाएगा, क्योंकि ऐसा करने से त्योहार से जुड़ी लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना किसी रोक-टोक के 24 घंटे पटाखे जलाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती है।
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायालय का उद्देश्य एक मध्यम मार्ग निकालना है। अदालत का मानना है कि एक तरफ जहां लोगों की धार्मिक आस्था और त्योहार की खुशियों का ध्यान रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिया कि दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाएगी। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि किस प्रकार के पटाखों (जैसे नियंत्रित या ग्रीन क्रैकर्स) का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके।
अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और केंद्र सरकार को पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक तत्वों (जैसे बेरियम) तथा शोर के स्तर (डेसिबल लिमिट) की जांच के लिए संयुक्त परीक्षण करने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इस तकनीकी प्रक्रिया और आउटडोर टेस्टिंग के लिए कोर्ट से समय मांगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट आगामी 15 अक्टूबर को अगली विस्तृत सुनवाई करेगा। माना जा रहा है कि उस दिन होने वाली सुनवाई के बाद ही दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए तय घंटों और अन्य शर्तों पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिसपर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

