इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बेंजामिन नेतन्याहू के इस शानदार राजनीतिक कमबैक का पूरा श्रेय खुद को दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले उनके द्वारा दिए गए सार्वजनिक समर्थन और बयानों ने ही चुनावी हवा का रुख पूरी तरह से पलट दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह समर्थन नेतन्याहू के कैंपेन के लिए एक ‘गेमचेंजर’ साबित हुआ, जिसके बिना इतनी बड़ी बढ़त हासिल करना मुश्किल था।
ट्रंप ने अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया कि चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में नेतन्याहू की स्थिति कमजोर आंकी जा रही थी और उनके विरोधी लगातार बढ़त का दावा कर रहे थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के स्पष्ट राजनीतिक समर्थन और बयानों के बाद इजरायल के भीतर नेतन्याहू के समर्थकों में नया उत्साह देखा गया। ट्रंप के अनुसार, उनके हस्तक्षेप और मजबूत संबंधों ने यह सुनिश्चित किया कि दक्षिणपंथी मतदाता एकजुट होकर बाहर निकलें और नेतन्याहू के पक्ष में मतदान करें।
इजरायल की राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव और उनकी लोकप्रियता एक बहुत बड़ा कारक मानी जाती है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी दूतावास को येरुशलम स्थानांतरित करने और अब्राहम अकॉर्ड जैसे ऐतिहासिक फैसलों की वजह से नेतन्याहू और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत व राजनीतिक रिश्ते बेहद गहरे रहे हैं। इजरायली मतदाताओं का एक बड़ा धड़ा ट्रंप के बयानों को कूटनीतिक रूप से बहुत अहम मानता है, और यही वजह है कि ट्रंप के इस समर्थन का असर जमीनी स्तर पर साफ तौर पर दिखाई दिया।
फिलहाल, चुनाव आयोग द्वारा अंतिम और आधिकारिक परिणामों की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती रुझानों ने नेतन्याहू के विरोधियों को चौंका दिया है। यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में तब्दील होते हैं, तो बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर इजरायल की सत्ता की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आएंगे। हालांकि, स्पष्ट और स्थिर सरकार के गठन के लिए उन्हें अपने छोटे धार्मिक और दक्षिणपंथी सहयोगियों के साथ मिलकर अंतिम गठबंधन समीकरणों को साधना होगा।
