दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल: सोशल मीडिया के दौर में हर दिन कुछ न कुछ नया और हैरान करने वाला सामने आता है, लेकिन हाल ही में पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके से आए एक वीडियो ने इंटरनेट जगत को झकझोर कर रख दिया है। दक्षिण 24 परगना जिले के गोसाबा ब्लॉक के सातजेलिया गांव में एक व्यक्ति को भगवान कृष्ण का वेश धारण कर धारदार ब्लेडों के ऊपर नंगे पैर नाचते देखा गया। इस दृश्य को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया और देखते ही देखते यह वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गया।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जमीन पर सैकड़ों की संख्या में धारदार ब्लेड सजाए गए हैं, जिनके ऊपर एक व्यक्ति बड़ी सहजता और संतुलन के साथ नृत्य कर रहा है। भगवान कृष्ण की पोशाक पहने इस कलाकार के चेहरे पर न तो दर्द की कोई शिकन है और न ही गिरने का कोई डर। इस हैरतअंगेज करतब को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। वीडियो के वायरल होते ही डिजिटल दुनिया में इसे लेकर चर्चाओं और बहसों का दौर शुरू हो गया है, जिसमें लोग इसे अपनी-अपनी नजरों से देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर यूजर्स के बीच दो फाड़ हो गए हैं। जहां एक ओर बड़ी संख्या में लोग इसे भक्ति की पराकाष्ठा, कड़ी साधना और असाधारण शारीरिक संतुलन का परिणाम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे ‘काला जादू’ या ‘अंधविश्वास’ करार दिया है। आधुनिक तकनीक के इस युग में कुछ यूजर्स इसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या कुशल वीडियो एडिटिंग का कमाल बताकर इसकी प्रमाणिकता पर भी सवाल उठा रहे थे। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या वाकई कोई इंसान ब्लेडों पर इस तरह नाच सकता है?
हालांकि, जब इस मामले की तहकीकात की गई, तो इसकी असल सच्चाई कुछ और ही निकली। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई फर्जी वीडियो या एडिटिंग नहीं है, बल्कि एक प्राचीन क्षेत्रीय परंपरा और धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है। सुंदरबन के इन दुर्गम इलाकों में ‘गजन’ और ‘चरक’ जैसे उत्सवों के दौरान भक्त अक्सर अपने शरीर को कष्ट देकर ईश्वर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि भक्ति की शक्ति के कारण ही इन कलाकारों को कोई चोट नहीं आती।
भले ही ग्रामीणों के लिए यह गहरी आस्था और परंपरा का प्रतीक हो, लेकिन प्रशासन और विशेषज्ञों ने सुरक्षा के लिहाज से इस पर चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि ऐसे खतरनाक प्रदर्शनों में मामूली सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। ब्लेड पर नृत्य करने जैसे कृत्यों को प्रोत्साहित करना न केवल असुरक्षित है, बल्कि यह दूसरों के लिए, विशेषकर बच्चों के लिए एक गलत उदाहरण पेश कर सकता है, जो बिना किसी प्रशिक्षण या सुरक्षा के इसे दोहराने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल, यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इस पर निरंतर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यह घटना एक बार फिर इस बहस को जन्म देती है कि आधुनिक भारत में परंपरा और तर्क के बीच का संतुलन कहां होना चाहिए। सुंदरबन के इस गांव में आस्था ने विज्ञान को चुनौती दी है या यह केवल शारीरिक संतुलन का एक अद्भुत उदाहरण है, यह सवाल अब भी लोगों के बीच बना हुआ है।

